शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र से पहले सीएम धामी की पहल, सांसदों और दलों को लिखा पत्र

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देहरादून, 13 अप्रैल । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगामी 16 अप्रैल से संसद में प्रस्तावित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र से पहले एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य के सभी सांसदों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रदेश अध्यक्षों को पत्र भेजा है। उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने और संसद में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि प्रस्तावित विशेष सत्र देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आधी आबादी को निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी रूप से शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि समावेशी समाज का निर्माण तभी संभव है जब महिलाओं को समान अवसर और नेतृत्व की भूमिका मिले।

धामी ने उल्लेख किया कि आज देश की बेटियाँ अंतरिक्ष, खेल, सशस्त्र बलों और स्टार्ट-अप्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। सार्वजनिक जीवन में उनकी बढ़ती भागीदारी समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में सभी दलों के सांसदों ने एकजुट होकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया था, जो भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों और संवैधानिक विद्वानों के सुझावों के आधार पर अब इस अधिनियम को उसकी पूर्ण भावना के साथ लागू करने का समय आ गया है। प्रस्ताव है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण लागू होने के बाद कराए जाएं, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा आएगी।

उत्तराखण्ड के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की सामाजिक-सांस्कृतिक परंपरा में मातृशक्ति को विशेष सम्मान दिया जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाएँ परिवार और समाज की आधारशिला रही हैं और कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। यह अधिनियम राज्य की महिलाओं के लिए नए अवसर खोलेगा।

उन्होंने कहा कि पंचायती राज, नगर निकायों और सहकारी संस्थाओं में महिला आरक्षण के सफल क्रियान्वयन से सक्षम महिला नेतृत्व उभरकर सामने आया है, जो अब राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर योगदान देने के लिए तैयार है।

मुख्यमंत्री धामी ने सभी दलों से इस विषय पर सहमति बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि यह मुद्दा किसी एक दल का नहीं, बल्कि देश की माताओं, बहनों और बेटियों के सम्मान और सशक्त भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से इस ऐतिहासिक बदलाव को साकार किया जा सकेगा।

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