राज्यपाल ने ली क्रीड़ा विश्वविद्यालय की प्रथम बैठक, तैयारियों को दी रफ्तार

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देहरादून: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड क्रीड़ा विश्वविद्यालय, प्रबन्ध परिषद की प्रथम बैठक लोक भवन में आयोजित की गई। बैठक में कुलपति अमित कुमार सिन्हा ने विश्वविद्यालय की स्थापना, शैक्षणिक योजनाओं, प्रशासनिक ढांचे, मानव संसाधन, प्रस्तावित पाठ्क्रम एवं अवस्थापना विकास से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में विश्वविद्यालय के शिक्षण एवं प्रशासनिक पदों के सृजन पर विचार विमर्श के उपरांत, औचित्य सहित प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराए जाने पर विचार किया गया।

कुलपति ने अवगत कराया कि विश्वविद्यालय की परिकल्पना वर्ष 2022 में की गई थी, अधिनियम मार्च, 2025 में पारित हुआ तथा 05 मई, 2025 को राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त हुई। विश्वविद्यालय का मुख्यालय गौलापार, हल्द्वानी में स्थापित है जिसे “मिशन ओलंपिक 2036” के लक्ष्य के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि क्रीड़ा विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का केंद्र न होकर उत्कृष्ट खेल संस्कृति के निर्माण का सशक्त संस्थान बने। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें उचित प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की है।

राज्यपाल ने कहा कि क्रीड़ा विश्वविद्यालय की कार्ययोजना ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को “ग्राम से ओलंपिक” तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करे। उन्होंने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, जिन्हें पहचानकर व्यवस्थित प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि राज्य में खेल संस्कृति की मजबूत नींव रखी जानी चाहिए, जिससे युवाओं में खेलों के प्रति रुचि और प्रतिस्पर्धात्मक भावना विकसित हो सके।

राज्यपाल ने क्रीड़ा विश्वविद्यालय को देश के अन्य खेल विश्वविद्यालयों एवं खेल संगठनों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने के निर्देश दिए, ताकि प्रशिक्षण, शोध, तकनीक और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के ऐसे गांवों को चिन्हित किया जाए, जहां से विशिष्ट खेल प्रतिभाएं उभरकर सामने आई हैं, ताकि उन क्षेत्रों को खेल प्रतिभा विकास के विशेष केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने विश्वविद्यालय के सफल संचालन के लिए वाइस चांसलर की स्वायत्तता को अनिवार्य बताया ताकि वे बिना किसी बाहरी प्रभाव के निर्णय ले सकें। इसके लिए उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी बताया।

इस बैठक में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आशीष चौहान, अपर सचिव मनुज गोयल, अपर सचिव नवनीत पाण्डे सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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