केंद्रीय बजट में खेल क्षेत्र को प्राथमिकता, 10 वर्षों के लिए ‘खेलो इंडिया मिशन’ का प्रस्ताव

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नई दिल्ली, 01 फ़रवरी । केंद्रीय बजट में खेल क्षेत्र को बड़ी प्राथमिकता दी गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में बजट पेश करते हुए खेल अवसंरचना, जमीनी स्तर पर प्रतिभा विकास और खेल उद्योग को मजबूत करने के लिए कई अहम घोषणाएं कीं।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में उच्च गुणवत्ता वाले और किफायती खेल उपकरणों के निर्माण की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने खेल वस्तुओं के लिए एक समर्पित पहल का प्रस्ताव रखा, जिससे मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ के तहत खेल उपकरण निर्माण को सशक्त करेगा और खिलाड़ियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करेगा।

इससे पहले केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने कहा था कि भारत में खेल उपकरण काफी महंगे हैं और अधिकांश उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण आयात किए जाते हैं। उन्होंने भरोसा जताया था कि यदि इन्हें देश में तय मानकों के साथ बनाया जाए, तो खेल पारिस्थितिकी तंत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है।

बीते कुछ वर्षों में खेल सरकार के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल रहा है। पिछले केंद्रीय बजट में युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय को 3,794.30 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जो इससे पहले के वर्ष की तुलना में 10.23 प्रतिशत अधिक था। इसमें सबसे अधिक लाभ ‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम को मिला, जो जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज और विकास पर केंद्रित है।

वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि ‘खेलो इंडिया मिशन’ को अगले 10 वर्षों के लिए और विस्तारित किया जाएगा। इस मिशन के तहत प्रतिभा विकास के लिए एकीकृत ढांचा, प्रशिक्षण केंद्र, खेल विज्ञान और तकनीक का समावेश, प्रतियोगिताओं और लीग्स का आयोजन तथा खेल अवसंरचना का विकास किया जाएगा।

भारत में खेलों पर बढ़ता यह जोर ऐसे समय में सामने आया है, जब देश 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने जा रहा है और 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भी बोली लगाने की तैयारी में है।

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