हिमाचल के किन्नौर में ठंड का प्रचंड रूप, पारे में लगातार गिरावट

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रिकांगपिओ: हिमाचल प्रदेश का जनजातीय क्षेत्र जिला किन्नौर अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और बर्फीली चोटियों के लिए जाना जाता है। यहां की सभी पर्वतमालाएं बाहर महीने बर्फ से ढकी रहती हैं। इन दिनों पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने और मौसम में बदलाव के कारण यहां रात में ठंड का प्रकोप काफी बढ़ गया है। बता दे कि किन्नौर के ऊंचाई वाले इलाके जैसे आसरंग, छितकुल, नाको, चारंग, नेसांग, कूनो, हांगो और चांगो आदि आबादी क्षेत्रों में हाल ही के महीने में हल्की बर्फबारी हुई थी। इन दिनों ऐसे सभी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी शीतलहर का भी असर देखा जा रहा है।

किन्नौर जिला के मालिंग, चारंग, आसरंगए नाको आदि कई स्थानों पर तो सडक़ पर बेहता पानी जमने लगा है। ऐसे फिसलन भरी सडक़ों पर वाहन चलाना काफी जोखिम पूर्ण बन गया है। इन दिनों किन्नौर का प्रमुख पर्यटन स्थल कल्पा, छितकुल सहित चारंग आदि क्षेत्रों में भी न्यूनतम तापमान माइनस पांच डिग्री से भी अधिक दर्ज किया जा रहा है। ठंड को देखते हुए इन सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आमद भी काफी कम देखी जा रही है। किन्नौर जिला में बढ़ते ठंड को देखते हुए इन दिनों यहां के किसान व बागबान अपने खेत-खलियान के कार्यों को तेजी से निपटाने में लगे हैं ताकि और बर्फबारी पढऩे से पूर्व काम को पूर्ण किया जा सके।

सेब की खेती के लिए ठंड का बढऩा फायदेमंद
सेब बागबानी के लिए बर्फबारी व ठंड फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि यह पानी के स्रोतों को रिचार्ज करती है और पौधों के लिए आवश्यक चिलिंग आवर्स पूरा करती है, जिससे बागबानों को फायदा होता है। बागबानी विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों के दौरान डोरमैंसी पीरियड में सेब के पौधे को एक निश्चित न्यूनतम तापमान मिलने से पौधों को कई रोगों से निजात मिलती है। वहीं, आगामी सेब की फसल भी बेहतर रहने की उम्मीद बढ़ जाती है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ठंड और बढऩे की संभावना है। मौजूदा समय में अधिकांश क्षेत्रों में मौसम साफ और शुष्क है, लेकिन जनजातीय क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने की संभावना बनी रहेगी।

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