किन्नर कैलाश यात्रा पर स्थायी रोक का पंचायत का फैसला हाईकोर्ट ने किया निरस्त
शिमला। धार्मिक आस्था की महत्वपूर्ण किन्नर कैलाश यात्रा को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने किन्नौर की पोवारी ग्राम पंचायत की ओर से वार्षिक किन्नर कैलाश यात्रा पर लगाए गए स्थायी प्रतिबंध को प्रभावी रूप से रोकते हुए पूर्व में पारित अंतरिम आदेश को स्थायी कर दिया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि बदली हुई परिस्थितियों में याचिका निष्प्रभावी हो चुकी है। इसके बाद अदालत ने पूर्व में जारी अंतरिम आदेश को स्थायी करते हुए मामले का निपटारा कर दिया।
गौरतलब है कि पोवारी ग्राम पंचायत ने 13 जुलाई 2026 को ग्राम सभा की विशेष बैठक में किन्नर कैलाश यात्रा को हमेशा के लिए रोकने का प्रस्ताव पारित किया था। बैठक में 112 लोगों ने यात्रा का विरोध किया, जबकि 62 लोग इसके समर्थन में थे। बहुमत के आधार पर पंचायत ने यात्रा पर स्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया था।
पंचायत ने यात्रा के आयोजन से जुड़ी पंजीकृत संस्था श्री प्रकाशंकरा किन्नर कैलाश यात्रा सोसायटी को भी भंग करने का आदेश दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ग्राम पंचायत के पास सदियों से चली आ रही धार्मिक यात्रा को रोकने का कानूनी अधिकार नहीं है।
अदालत ने यह भी पाया था कि किन्नर कैलाश यात्रा का आयोजन राज्य सरकार और प्रशासन की उच्चस्तरीय समिति की ओर से निर्धारित सुरक्षा एवं प्रशासनिक प्रोटोकॉल के तहत किया जाता है। कोर्ट के अनुसार, ग्राम पंचायत के पास न तो पंजीकृत संस्थाओं को भंग करने का अधिकार है और न ही देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी इस प्राचीन धार्मिक यात्रा को रोकने की कानूनी क्षमता।
हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करते हुए यात्रा का सुचारू संचालन कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही पोवारी ग्राम पंचायत को यात्रा में किसी भी प्रकार की बाधा या हस्तक्षेप नहीं करने के लिए पाबंद किया गया था। किन्नर कैलाश यात्रा का आयोजन हर वर्ष जुलाई माह में किया जाता है।
शाहपुर नगर परिषद आरक्षण मामले में याचिका खारिज
वहीं, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांगड़ा जिले की शाहपुर नगर परिषद के चुनाव के लिए तैयार किए गए आरक्षण रोस्टर और वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों में कथित हेरफेर के आरोपों को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल और न्यायमूर्ति योगेश जसवाल की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर याचिका को खारिज कर दिया।
मामले में राकेश चौहान की ओर से रिट याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि शाहपुर के वार्ड नंबर-2 (हारा वार्ड) का आरक्षण रोस्टर तैयार करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों में हेरफेर की गई। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह सामान्य श्रेणी से चुनाव लड़ना चाहता था, लेकिन हारा वार्ड को अनुसूचित जाति (महिला) के लिए आरक्षित किए जाने के कारण वह चुनाव नहीं लड़ सका।
याचिका में यह भी दावा किया गया था कि वर्ष 2020-21 के नगर पंचायत चुनाव में हारा वार्ड को आरक्षित किया जाना चाहिए था, लेकिन नियमों के विपरीत वार्ड नंबर-3 झूलर को आरक्षित किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में किसी प्रकार की गड़बड़ी या दुर्भावना साबित नहीं हुई है। अदालत ने यह भी कहा कि शाहपुर नगर परिषद के चुनाव पहले ही संपन्न हो चुके हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया अथवा परिणामों में किसी प्रकार के हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
