ट्रंप की ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी
WASHINGTON, DC - MAY 11: U.S. President Donald Trump delivers remarks at a 'Rose Garden Club' dinner for National Police Week in the Rose Garden at the White House on May 11, 2026 in Washington, DC. Trump hosted leaders of various law enforcement organizations in honor of officers fallen in the line of duty. (Photo by Kevin Dietsch/Getty Images)
वाशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के दौरान वाणिज्यिक जहाजों या कार्गो को हुए किसी भी नुकसान की भरपाई अमरीका के कब्जे में मौजूद ईरान की जब्त की गई संपत्ति से की जाएगी। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि अमरीका तुरंत युद्धविराम करने के बजाय ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा। श्री ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा कि जहाजों या कार्गो को हुए किसी भी नुकसान का भुगतान ईरान के उस पैसे से किया जाएगा जो अमेरिका के कब्ज़े और नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि ये नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है, लेकिन फिर भी, यही सही और उचित कदम है।
राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी जहाजों को निशाना बनाने के एक दिन बाद आया है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढक़र लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल हो गयी हैं। लाल सागर में जहाजों पर हुए हमलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमलों से पहले से ही पैदा हुई दिक्कतों को और बढ़ा दिया है। ईरान की अरबों डॉलर की जब्त की गई संपत्ति का मामला लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच सबसे विवादित मुद्दों में से एक रहा है। जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते (एमओयू) में इन संपत्तियों को जारी करना एक मुख्य बात थी, लेकिन तनाव बढऩे और दोनों तरफ से सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू होने के कारण वह समझौता असल में खत्म हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ तुरंत युद्धविराम की संभावना को भी खारिज कर दिया और कहा कि लगातार सैन्य दबाव बनाए रखना ज़रूरी है।
पर्यावरण संरक्षण एजेंसी में पत्रकारों से बात करते हुए श्री ट्रंप ने कहा कि हम ईरान के खिलाफ़ बहुत अच्छा कर रहे हैं, हम बहुत ही अच्छा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे कुछ करना चाहते हैं, लेकिन मेरा कहना है कि वे अभी तैयार नहीं हैं। उन्हें अभी और दबाव की ज़रूरत है। श्री ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर कुछ बुरे इरादे रखने का आरोप लगाया और अपनी पुरानी बात दोहराई कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने दिया जाएगा। ये बातें तब कही गईं जब अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर ठिकानों पर लगातार 13वीं रात हमले किए। अमेरिका के केंद्रीय कमान (सेंटकॉम ) ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि ताज़ा अभियान शाम 6:45 बजे शुरू हुआ और इसका मकसद ईरान को जवाबदेह ठहराना और वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स से होने वाले खतरों को कम करना था। बाद में सेंटकॉम ने घोषणा की कि हमले रात नौ बजे खत्म हो गए। उन्होंने कहा कि अमरीकी सेना ने ईरानी सैन्य कमान केंद्रों, ड्रोन स्टोरेज केंद्रों , संचार नेटवर्क, तटीय निगरानी केंद्रों और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजऱने वाले आम नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों के लिए ईरान से होने वाले खतरे को और कम किया जा सके। सेना ने निशाना बनाए गए ठिकानों की संख्या या नुकसान का कोई ब्योरा नहीं दिया।
अमरीका के ये ताज़ा अभियान एक हफ़्ते से ज़्यादा समय से चल रहे लगातार हवाई हमलों के बाद हुए हैं। ये हमले तब शुरू हुए जब ईरान ने दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजऱने वाले जहाजों पर हमले शुरू कर दिए। अमेरिका ने इस रणनीतिक जलमार्ग में ईरानी शिपिंग पर नौसैनिक नाकाबंदी भी फिर से लागू कर दी है, जिससे संघर्ष और बढ़ गया है। इलाके में बढ़ते इस टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। लाल सागर में हूती हमलों से तेल निर्यात के एक और अहम समुद्री रास्ते पर खतरा पैदा हो गया है। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने से पहले से ही हो रही रुकावटें और बढ़ गई हैं। इन हालात के चलते मई के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं। इस टकराव की वजह से अमेरिका में भी राजनीतिक मतभेद पैदा हो गए हैं। अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ने कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई रोकने के प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। हालांकि सीनेट में ऐसा ही एक प्रस्ताव पास नहीं हो सका। भले ही ये वोट प्रशासन के लिए बाध्यकारी नहीं थे, लेकिन इनसे कुछ सांसदों के बीच श्री ट्रंप द्वारा राष्ट्रपति के युद्ध-संबंधी अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंता ज़ाहिर हुई। व्यापक क्षेत्रीय युद्ध के ख़तरे को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बावजूद, ट्रंप ने संकेत दिया कि तेहरान पर सैन्य दबाव कम नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं है और लगातार हमले करना ही अमेरिका का पसंदीदा रास्ता बना रहेगा।
