नेपाल में बाढ़ के बाद फिर मंडराया बड़ा खतरा, चीन ने बैरियर लेक टूटने का जारी किया अलर्ट
काठमांडू। नेपाल के तीन जिलों में भोटेकोसी नदी में अचानक आई बाढ़ से मची तबाही के बाद खतरा अभी टला नहीं है। चीन की तरफ से इसको लेकर अलर्ट किया गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने कहा कि नेपाल में छोछेन खोला और पुरेपू त्सांगपो नदियों के संगम के पास एक बड़ी अवरोधक झील (बैरियर लेक) बन गई है, जिसका जल आयतन गुरुवार सुबह तक 20 लाख घन मीटर अनुमानित है और झील पहले ही ओवरफ्लो हो रही है। अगले तीन दिनों में 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी के झील में आने की उम्मीद है, जिससे इसके टूटने का उच्च जोखिम है। बता दें कि 26 अगस्त को नेपाल में आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचाई। नेपाल के आठ जिलों से कुल 359 शव बरामद किए जा चुके हैं। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण कफ्ले ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से संशोधित आंकड़ों की पुष्टि की। 1500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।
लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक शामिल हैं, जो या तो ट्रैकिंग के लिए क्षेत्र में पहुंचे थे या हिंदुओं के पवित्र स्थलों की यात्रा पर थे। लापता विदेशी पर्यटकों की संख्या 517 हैं। उधर, चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि 558 लोग लापता हैं। बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए भारत में भी हलचल है। गुरुवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विशेष समीक्षा बैठक की। इस बैठक में विदेश मंत्रालय की टीम और काठमांडू तथा बीजिंग में भारत के राजदूत मौजूद रहे। इस दौरान राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद लोगों की सुरक्षा पर चर्चा की गई। इस दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद सभी भारतीयों की स्थिति और उनकी सुरक्षा के बारे में जानकारी जुटाने के लिए तेजी से प्रयास करने को कहा गया है।
नेपाल आपदा पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा नेपाल में 288 भारतीय नागरिक अभी संपर्क में नहीं हैं। इसमें 73 नागरिक वहां पर एक पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने दो विमानों में मानवीय सहायता नेपाल भेजी है। पहली बार में 10 टन रिलीफ मैटेरियल और दूसरी बार में 37.5 टन रिलीफ मैटेरियल भेजा गया है. इसमें आठ टन मेडिसिन शामिल हैं।
