यूएनएससी में भारत ने पेश की दावेदारी, शांति मिशन से दुनिया को दिया भरोसा

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न्यूयार्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के 2028-29 के कार्यकाल के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार सुबह न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सुरक्षा परिषद में भारत के चुनाव अभियान की आधिकारिक रूप से शुरुआत की। भारत एशिया-पैसिफिक ग्रुप की सीट के लिए चुनाव लड़ रहा है और इस चुनाव में उसका मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा। ताजिकिस्तान को पहले ही 57 सदस्यों वाले ‘ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन’ का समर्थन मिल चुका है, जबकि भारत को अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, श्रीलंका और ऑस्ट्रिया का समर्थन मिला है।

जयशंकर ने अपनी उम्मीदवारी पेश करते हुए सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध विश्व के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की है और कहा है कि विकासशील देशों की आवाज को सशक्त बनाना तथा अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों में इन देशों की चिंताओं को उचित स्थान देना उसकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने भारत के ‘शांति’ दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मानदंडों, विश्वास और सत्यनिष्ठा के माध्यम से दुनिया में समग्र प्रगति सुनिश्चित करना है। यदि भारत को अस्थायी सदस्य चुना जाता है, तो वह आतंकवाद की फंडिंग पर रोक लगाने, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और एआई जैसी उभरती तकनीकों के जिम्मेदार एवं मानव-केंद्रित उपयोग को अपनी प्राथमिकता बनाएगा।

हिंदुस्तान आठ बार बन चुका है अस्थायी सदस्य
यूएनएससी की अस्थायी सदस्यता हासिल करने के मामले में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। भारत को इससे पहले आठ बार दो-दो साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चुना गया है। 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 और 2021-22 में भारत यूएनएससी का अस्थायी सदस्य रह चुका है। इस तरह भारत ने अस्थायी सदस्य के तौर पर कुल 16 साल काम किया है।

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