230 साल बाद बन रहा दुर्लभ ‘शश-महालक्ष्मी योग’, 15 जुलाई से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि

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देहरादून। सनातन धर्म में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस वर्ष 15 जुलाई से शुरू होने वाली गुप्त नवरात्रि को ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 230 वर्ष बाद दुर्लभ ‘शश-महालक्ष्मी योग’ का निर्माण हो रहा है, जिसे धन, समृद्धि और संकटों से मुक्ति का विशेष संयोग माना जाता है।

इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026 (बुधवार) से होगा और इसका समापन 22 जुलाई 2026 (बुधवार) को होगा। सामान्य नवरात्रि की अपेक्षा गुप्त नवरात्रि में साधना, मंत्र-जाप और पूजा-अनुष्ठान गोपनीय रूप से किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा साधकों को विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।

धार्मिक मान्यता है कि गृहस्थ जीवन से जुड़े लोग भी यदि इस अवधि में श्रद्धा, नियम और विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा करें तो जीवन की परेशानियों से राहत मिलने के साथ नए कार्यों में सफलता और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

गुप्त नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 15 जुलाई को सुबह 8:02 बजे घटस्थापना का शुभ मुहूर्त माना गया है। इस समय पुष्य नक्षत्र और हर्षण योग का शुभ संयोग रहेगा, जिसके बाद वज्र योग का प्रभाव प्रारंभ होगा।

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने से साधना का विशेष फल प्राप्त होता है और परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास होता है।

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