शिक्षा केवल आजीविका नहीं, जीवन को श्रेष्ठ बनाने का माध्यम: पीएम मोदी

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नई दिल्ली, 03 अप्रैल । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी अनमोल पूंजी है, जिसके बल पर देश की युवा शक्ति हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है और भारत का नाम रोशन कर रही है।

प्रधानमंत्री ने आज एक्स में एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया, “श्रियः प्रदुग्धे विपदो रुणद्धि यशांसि सूते मलिनं प्रमार्ष्टि। संस्कारशौचेन परं पुनीते शुद्धा हि बुद्धिः किल कामधेनुः॥” इस सुभाषित का अर्थ है शुद्ध और संस्कारित बुद्धि मनुष्य के लिए कामधेनु के समान होती है। ऐसी बुद्धि समृद्धि को बढ़ाती है, विपत्तियों को दूर करती है, यश दिलाती है और जीवन के दोषों व मलिनता को मिटाती है। संस्कार और पवित्रता से युक्त बुद्धि मनुष्य को सर्वोत्तम बनाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सुभाषित के माध्यम से यह संदेश दिया कि शिक्षा और संस्कार से युक्त बुद्धि ही व्यक्ति और समाज को उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करती है।

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