जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का बड़ा प्रदर्शन, दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
नई दिल्ली। NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक विवाद के विरोध में आज ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के सदस्यों ने राष्ट्रीय राजधानी के ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर अपना मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारी लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस बड़े आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पूरी मुस्तैदी दिखाई है।
सीजेपी के इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कमर कस ली है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अर्धसैनिक बलों की लगभग 40 कंपनियों को तैनात किया गया है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के तहत दिल्ली के इन प्रमुख रणनीतिक और संवेदनशील केंद्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है। मध्य दिल्ली (सेंट्रल दिल्ली) और जंतर-मंतर की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर कई स्तरों वाली (मल्टी-लेयर) बैरिकेडिंग की गई है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डा, प्रमुख रेलवे स्टेशन और अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT)। दिल्ली को पड़ोसी राज्यों (हरियाणा और उत्तर प्रदेश) से जोड़ने वाले सभी सीमा प्रवेश बिंदुओं पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है।
सुरक्षा की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न जिलों के संयुक्त पुलिस आयुक्तों, पुलिस उपायुक्तों (DCP), अतिरिक्त पुलिस उपायुक्तों और सहायक पुलिस उपायुक्तों सहित वरिष्ठ अधिकारियों को खुद ‘फील्ड ड्यूटी’ पर तैनात रहकर सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दिल्ली में आने-जाने वाले संदिग्ध वाहनों की जांच भी तेज कर दी गई है।
अमेरिका से भारत लौटे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में यह प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। जंतर-मंतर पर जमा हुए युवाओं, छात्रों और अभिभावकों की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए दीपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पहुंचने पर उन्हें काफी देर तक एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया गया। हालांकि, पहले से तय रणनीति के तहत सीजेपी ने घोषणा की थी कि उन्हें दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की औपचारिक अनुमति मिल गई है, जिसके बाद भारी संख्या में प्रदर्शनकारी वहां जुटने शुरू हुए।
यह आंदोलन पूरी तरह से युवाओं और छात्रों पर केंद्रित है। दरअसल, परीक्षाओं में हो रही धांधलियों और हालिया छात्र आत्महत्याओं को लेकर सोशल मीडिया पर शुरू हुआ एक डिजिटल अभियान अब ज़मीनी आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल है और जब तक शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, उनका संवैधानिक और शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा।
