शत्रु संपत्तियों पर धामी सरकार का हंटर: अरबों की जमीन अवैध कब्जों से होगी मुक्त, सीएम ने दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश

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देहरादून, 17 फरवरी । उत्तराखंड में चिन्हित शत्रु संपत्तियों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद प्रशासन ने राज्यभर में चिन्हित शत्रु संपत्तियों की फाइलें खंगालने शुरू कर दी हैं।केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि चिन्हित शत्रु संपत्तियों को जिलाधिकारी अपने कब्जे में लेकर शासन के माध्यम से रिपोर्ट भेजें। इन संपत्तियों का उपयोग केवल जनहित में किया जा सकता है और इन्हें किसी निजी व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 34 शत्रु संपत्तियां चिन्हित हैं।

नैनीताल स्थित एक शत्रु संपत्ति को खाली कराकर उसके जनहित में उपयोग की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। हरिद्वार और उधम सिंह नगर के किच्छा क्षेत्र में भी शत्रु संपत्तियों के मामले सामने आए हैं। आईएसबीटी के पास टर्नर रोड पर करीब 70 बीघा भूमि शत्रु संपत्ति के रूप में चिन्हित है। माजरा क्षेत्र में लगभग 1800 बीघा जमीन भी शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज बताई जा रही है। इन दोनों संपत्तियों की अनुमानित कीमत अरबों रुपये में आंकी जा रही है। देहरादून में फैज मोहम्मद के नाम दर्ज संपत्तियों की कार्रवाई फिर धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। आरोप है कि कुछ भू-माफिया फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन जमीनों पर अवैध कब्जा जमाए हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार, 34 शत्रु संपत्तियों की फाइलें खोली गई थीं। जिला प्रशासन ने कुछ मामलों में दस्तावेजों की जांच और मौका मुआयना भी किया, लेकिन इसके बाद फाइलें ठंडे बस्ते में चली गईं।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य में चिन्हित सभी शत्रु संपत्तियों की पहचान करा ली गई है और अब उन्हें अवैध कब्जों से मुक्त कराने की प्रक्रिया जारी है। उत्तराखंड में जितनी भी शत्रु संपत्तियों के विषय में केंद्र से सूचना आई है, उनकी पहचान कराई गई है। शासन स्तर से सभी जिला अधिकारियों को कहा गया है कि वे इन्हें खाली करवा कर उनका जनहित में उपयोग करें।

नैनीताल स्थित शत्रु संपत्ति को प्रशासन खाली करा चुका है। इसका उपयोग पार्किंग के लिए किए जाने की अनुमति दी गई है। बताया जाता है कि उत्तराखंड गठन के बाद भी देहरादून और हरिद्वार के पुराने राजस्व अभिलेख सहारनपुर कमिश्नरी में सुरक्षित थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कथित रूप से फर्जीवाड़ा किया गया। पूर्व में जिला प्रशासन की ओर से मूल अभिलेख मंगवाने के बाद जांच शुरू हुई थी, लेकिन अब कार्रवाई की रफ्तार धीमी है। उन संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है, जिनके मालिक देश विभाजन के समय पाकिस्तान या बाद में चीन जाकर बस गए और वहां की नागरिकता ले ली। ऐसी संपत्तियों का नियंत्रण केंद्र सरकार के अधीन होता है।

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