विपक्ष के सवालों पर सदन में भारी हंगामा, विधानसभा अध्यक्ष ने 10 मिनट के लिए स्थगित की कार्यवाही

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लखनऊ, 13 फरवरी। उत्तर प्रदेश विधानसभा बजट सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान बेरोजगारों को रोजगार, आउटसोर्सिंग और नौकरी में आरक्षण का मुद्दा उठा। बिजली और सड़क हादसों में हो रही मौत का मुद्दा भी उठा। सदन में गहमा गहमी भी दिखी। इसी बीच आरक्षण के मुद्दे पर पीठ की अनुमति के बगैर सदस्यों के बोलने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने नाराजगी जाहिर की और सदन 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया।

उत्तर प्रदेश विधान सभा की कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे सपा के सदस्य अनिल प्रधान के सवाल पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के जवाब से शुरू हुई। परिवहन मंत्री ने ड्राइविंग लाइसेंस की पूरी प्रक्रिया और उसके लिए निर्धारित शुल्क के बारे में सदन में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लाइसेंस के लिए कम से 18 साल की आयु निर्धारित है।

एक अन्य सवाल के जवाब उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के प्रमुख कारणों में हाई स्पीड शामिल है। हमारी सरकार ने हाई स्पीड रोकने को कैमरे लगवाए। लोग कैमरे के सामने गाड़ी की गति धीमी कर लेते हैं। इसको देखते हुए हमने इन और आउट का सिस्टम लगाया। लोग आउट होने के स्थान से पहले चाय के लिए रुक जाते हैं। फिर समय का संतुलन बनाते हैं लेकिन स्पीड कम नहीं करते। नो हेलमेट नो फ्यूल लागू किया गया। इसका भी तोड़ निकाल लिए। लोग पेट्रोल पंप के बाहर हेलमेट किराए पर देने लगे। कुल 351 मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर के पद का अध्याचन भेजा गया है।

सपा के सदस्य डॉ. राकेश कुमार वर्मा ने श्रम विभाग से जुड़ा एक सवाल करते हुए एक शायरी पढ़कर कहा कि महलों में रोशनी और झोपड़ियों में अंधेरा है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि अब ऐसा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घर घर बिजली पहुंचाई। केवल खम्भा नहीं लगाया गया है। खम्भा लगाया, तार लगाया और बल्ब भी लगाए। आज झोपड़ियों में भी रोशन है। उत्तर प्रदेश में एक करोड़ 18 लाख घरों में बिजली का कनेक्शन दिया।

विपक्ष के सदस्य संग्राम सिंह के संविदा कर्मियों को नियमित करने की किसी नीति के बारे किये गए एक अन्य सवाल पर श्रम मंत्री अनिल राजभर ने सरकार का पक्ष रखा। राजभर ने सदन को अवगत कराया कि किसी कर्मचारी को सेवा से बाहर नहीं किया जा रहा है। उनका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। रही बात नियमित करने की तो संविदा कर्मियों को नियमित करने की कोई व्यवस्था नहीं है। 19 सितंबर 2025 को आउटसोर्स सेवा निगम कारपोरेशन का गठन करने का शासनादेश जारी किया गया। प्रदेश में कारपोरेशन का गठन किया जा चुका है।

इससे पहले इस बीच नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने अनुपूरक किया कि संविदा कर्मियों के लिए सरकार एजेंसी को 14 हजार रुपये प्रति माह भुगतान करती है लेकिन एजेंसी से कर्मचारियों को 10 हजार रुपये ही मिलते हैं। क्या सरकार कर्मियों को 14 हजार रुपये दिलाएगी।

इंजीनियर बृजेश कठेरिया ने सवाल किया कि 2022 से सेवा योजना कार्यालय में पंजीकृत कितने युवाओं को रोजगार मिला है। इस लर श्रम मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम कारपोरेशन आउटसोर्सिंग में आरक्षण का प्रावधान करेगा। पिछड़ों दलितों को इसका लाभ मिलेगा। निजी क्षेत्र में कौशल के आधार पर नौकरी मिलती है। निजी क्षेत्र में आरक्षण का प्रावधान नहीं है।

सपा की सदस्य रागिनी के आरक्षण के सवाल पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि रिक्त पदों का कैलेंडर जारी हो जाती है। 30 दिसम्बर को 20276 का कैलेंडर जारी किया गया है। आरक्षण का पूरा पालन किया गया जा रहा है। आयोग के माध्यम से अप्रैल 2017 से 47 हजार 704 भर्ती की गयी है। 18 हजार 04 सामान्य वर्ग को। ईडब्ल्यूएस 2081, अनुसूचित जाति 9581 और अनुसूचित जनजाति के 447 और 17 हजार 295 ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को नौकरी मिली है। इस रागिनी सोनकर ने असहमति जताईं। इस बीच सत्ता पक्ष की सदस्य केतकी सिंह उठकर बोलने लगीं। दोनों पक्षों को शांत कराते हुए अध्यक्ष ने पूर्वाह्न 11:35 बजे सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

11: 45 बजे सदन की कार्यवाही पुनः शुरू हुई तो अध्यक्ष ने कहा कि पिछले चार सालों में यूपी विधानसभा का परसेप्शन पूरे देश में बहुत अच्छा गया है। इसमें केवल मेरा योगदान नहीं है। यह सभी 403 सदस्यों के प्रयासों से हुआ है। अध्यक्ष ने कहा कि दो सदस्यों ने इसी हाउस में शर्ट उतारी थी। मेरा मानना है कि वह केवल दो सदस्यों ने शर्ट नहीं उतारी थी। वह 403 सदस्यों की शर्ट उतरी थी। मैं ऐसा नहीं होने दूंगा। कोई भी सदन चलाएगा। यह नहीं होगा। इसके बाद विपक्ष के सदस्यों कमाल अख्तर, महबूब अली, संग्राम सिंह यादव, आराधना मिश्रा मोना और सत्ता पक्ष से संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने शायरी की कुछ पंक्तियां पढ़कर सदन के माहौल को हल्का किया। इसके बाद प्रश्नकाल की कार्यवाही आगे बढ़ी।

होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने बताया कि 2017 से पहले और आज में जमीन आसमान का अंतर आया है। पहले 375 रुपये मिलते थे। आज मानदेय और दैनिक भत्ता मिलाकर 948 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं। होमगार्ड स्वयंसेवी हैं। अवैतनिक हैं।

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