साल की पहली पूर्णिमा आज: रात के अंधेरे में चमकेगा ‘वुल्फ मून’

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नई दिल्ली: आज शनिवार को साल 2026 की पहली पूर्णिमा है। पौष मास की इस पूर्णिमा में चांद अपने पूरे आकार में होगा। लेकिन यह कोई साधारण पूर्णिमा नहीं है, चांद इस दिन अन्य पूर्णिमा के मुकाबले थोड़ा ज्यादा बड़ा नजर आता है। आज यानी 3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के सबसे नजदीक होती है जिसे पेरिहीलियन बिंदु कहा जाता है। चूंकि आज पूर्णिमा भी है, इसलिए चंद्रमा पृथ्वी के दूसरी तरफ आकर सूर्य के ठीक सामने होगा जिससे यह कुछ ज्यादा बड़ा दिखाई देगा। इतना ही नहीं, आज बृहस्पति को भी इसके नजदीक देखा जा सकेगा, जो काफी चमकीला दिखने वाला है।

आज रात पूर्णिमा पर आसमान में चाद एक खास अंदाज में दिखाई देगा। आसमान में दिखाई देने वाले इस चांद को वुल्फ मून कहा जाता है। आज सूर्यास्त के बाद आप आसमान में इस नजारे को देख पाएंगे। Wolf अंग्रेजी में भेड़िया के लिए इस्तेमाल होता है। कहा जाता है कि पुराने समय में सर्दियों के इन दिनों में लोगों को रात में भेड़ियों की बहुत अधिक आवाजें सुनाई देती थीं। ये भेड़िये रात में अपना खाना खोजने के लिए निकलते थे। इसलिए इनकी आवाजें अन्य दिनों की अपेक्षा बहुत अधिक सुनाई देती थीं। इसलिए इस पूर्णिमा के चांद को वूल्फ मून भी कह दिया जाता है।

वुल्फ मून, या पौष पूर्णिमा का चांद बेहद खास है। यह इसके बाद सालभर तक इतने बड़े आकार और इतने चमकीले रूप में नजर नहीं आएगा। आज की खास पूर्णिमा के दिन चांद अन्य पूर्णिमाओं से 30% ज्यादा चमकीला दिखेगा। साथ ही यह 14% ज्यादा बड़ा भी दिखाई देगा। इसके बाद इस तरह का नजारा देखने के लिए आपको 9 महीने का इंतजार करना होगा जब 24 नवंबर 2026 को फिर से इतना ही बड़ा चांद आसमान में खिलेगा।

वुल्फ मून का नजारा आज, 3 जनवरी की रात को दिखाई देने वाला है। सूर्यास्त के बाद यह नजारा आसमान में दिखने वाला है। जैसे ही सूरज ढलता है, पूर्व की ओर मुंह करके देखने पर नारंगी रंग का बड़ा सा चांद खिलता देखा जा सकेगा। यह नंगी आंखों से भी देखा जा सकेगा। कहा जा रहा है कि इस तरह का नजारा इससे पहले 1912 में देखा गया था। इसलिए यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना होने वाली है।

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