राज्यपाल से हाइड्रोकार्बन शिक्षा और अनुसंधान सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. मेहरा ने की शिष्टाचार भेंट

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देहरादून: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह से बुधवार को राजभवन में हाइड्रोकार्बन शिक्षा और अनुसंधान सोसाइटी (Hydrocarbon Education and Research Society – HERS) के अध्यक्ष डॉ. शरद मेहरा ने शिष्टाचार भेंट की। यह भेंट राज्य में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास के विषयों पर केंद्रित रही।

डॉ. शरद मेहरा ने राज्यपाल को हाइड्रोकार्बन शिक्षा और अनुसंधान सोसाइटी के उद्देश्यों, वर्तमान गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार HERS राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और ऊर्जा से संबंधित क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवीन अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने सोसाइटी के प्रयासों की सराहना की और कहा कि ऊर्जा क्षेत्र आज देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। “ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए हाइड्रोकार्बन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में उच्च स्तरीय अनुसंधान और विशिष्ट कौशल विकास समय की मांग है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में, ऊर्जा के कुशल उपयोग और नवीन तकनीकों का महत्व और भी बढ़ जाता है।”

राज्यपाल ने डॉ. मेहरा से विशेष रूप से यह जानने का प्रयास किया कि HERS किस प्रकार उत्तराखंड के युवाओं को हाइड्रोकार्बन और संबद्ध क्षेत्रों में रोज़गारपरक कौशल प्रदान करने में योगदान दे सकती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राज्य की शैक्षिक संस्थाओं और अनुसंधान केन्द्रों को उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए।

डॉ. मेहरा ने राज्यपाल को आश्वस्त किया कि सोसाइटी का ध्यान पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ ऊर्जा समाधानों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि HERS राज्य के शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर ऐसे कार्यक्रम शुरू करने पर विचार कर रही है, जो छात्रों को उद्योग के लिए तैयार कर सकें।

राज्यपाल ने डॉ. मेहरा को सुझाव दिया कि सोसायटी को राज्य में हाइड्रोजन ऊर्जा, बायो-फ्यूल्स और कार्बन कैप्चर जैसी नई ऊर्जा तकनीकों पर अनुसंधान को प्रोत्साहित करना चाहिए। यह भी चर्चा हुई कि HERS, राजभवन के मार्गदर्शन में, राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग कर सकती है ताकि अनुसंधान के परिणामों को जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके। यह शिष्टाचार भेंट इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार और राजभवन, तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से उत्तराखंड को ऊर्जा क्षेत्र में एक मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

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