जोरदार हंगामे के साथ शुरू हुआ दूसरा दिन, 12 बजे तक के लिए स्थगित हुई कार्यवाही

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नई दिल्लीः संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ा, जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। सत्र के पहले दिन विपक्ष ने पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की मांग की थी, जिसके बाद हंगामे के कारण सदनों की कार्यवाही रुक गई थी। हालांकि, राज्यसभा ने सोमवार को ‘वहन-पत्र विधेयक 2025’ पर चर्चा के बाद ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया, जो पोत परिवहन क्षेत्र से जुड़ा है।

हंगामे की वजह से उच्च सदन में शून्यकाल नहीं हो पाया। सदन की बैठक शुरू होने पर उपसभापति हरिवंश ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद उन्होंने बताया कि उन्हें, नियत कामकाज स्थगित कर बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद समेत अन्य विषयों पर चर्चा करने के लिए सदस्यों की ओर से कुछ नोटिस मिले हैं।

हरिवंश ने कहा कि नोटिस यथोचित न पाए जाने की वजह से अस्वीकार कर दिए गए हैं। इसी दौरान विपक्षी सदस्यों ने अपने-अपने मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कुछ सदस्य अपने स्थानों से उठकर आगे भी आ गए। शोरगुल के बीच ही उपसभापति ने शून्यकाल के तहत सदस्यों से मुद्दे उठाने को कहा। उन्होंने नारेबाजी कर रहे सदस्यों से अपने स्थानों पर लौट जाने और शांत रह कर सदन की कार्यवाही चलने देने का अनुरोध किया। हंगामा थमते न देख उन्होंने करीब 11 बजकर पांच मिनट पर बैठक को दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के इस्तीफा देने के एक दिन बाद उपसभापति हरिवंश ने राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता की।

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