हाईकोर्ट ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लगाई फटकार, कहा- पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूलने का अधिकार NGT के पास

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लखनऊ : हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरण क्षतिपूर्ति अधिरोपित करने का कोई अधिकार नहीं है। न्यायालय ने कहा कि ऐसी क्षतिपूर्ति अधिरोपित करने की शक्ति सिर्फ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को है। यह निर्णय न्यायमूर्ति एआर मसूदी व न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने 177 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया।

याचिकाएं अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों की ओर से दाखिल की गई थीं। याचिकाओं में पर्यावरण को हानि पहुंचाने के आरोप में उक्त औद्योगिक इकाइयों पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लगाई गई क्षतिपूर्ति के आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल अधिनियम के तहत सिर्फ ट्रिब्यूनल को ही पर्यावरण क्षतिपूर्ति अधिरोपित करने की शक्ति है।

 न्यायालय ने यह भी कहा कि जल प्रदूषण के संबंध में राज्य सरकार भी कानून बना सकती है, लेकिन प्रदेश में ऐसा कोई विधान लागू नहीं किया गया है। असम, बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल राज्यों में जल प्रदूषण को लेकर कानून बने हुए हैं। न्यायालय ने आगे कहा कि हमें आशा और विश्वास है कि प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कानूनों को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाया जाएगा तथा यदि विधायी या कार्यपालिका स्तर पर कोई त्रुटियां हैं, तो उन्हें दूर किया जाएगा।

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