क्या अधिक पूजा करने से बढ़ता है दुख, प्रेमानंद महाराज का विवादित बयान

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धर्म : प्रेमानंद महाराज ने कहा कि सच्ची और भक्तिपूर्ण पूजा से कभी दुख नहीं बढ़ता, बल्कि घटता है और जीवन में सुख-शांति आती है। दुख बढ़ने का कारण पूजा नहीं, बल्कि उसके पीछे की गलत भावनाएं, अधूरापन या अज्ञानता है। प्रेमानंद महाराज के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति दिखावे के लिए, स्वार्थवश या बिना समझे पूजा करता है, तो उसे अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते और निराशा के कारण दुख बढ़ सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए पूजा करता है और फल की अत्यधिक इच्छा रखता है, तो इच्छा पूरी न होने पर उसे गहरा दुख होता है। सच्ची भक्ति बिना किसी फल की इच्छा के किया गया कर्म है। कुछ लोग दूसरों को प्रभावित करने या अपनी धार्मिक भावनाओं को दिखाने के लिए पूजा करते हैं। ऐसी स्थिति में, जब उन्हें समाज से अपेक्षित सम्मान या मान्यता नहीं मिलती है, तो उनका अभिमान आहत होता है और वे दुखी होते हैं।

यदि पूजा का मुख्य उद्देश्य केवल धन, प्रसिद्धि या भौतिक भोग प्राप्त करना है और ये चीजें प्राप्त नहीं होती हैं, तो व्यक्ति दुखी हो जाता है। प्रेमानंद महाराज इस बात पर जोर देते हैं कि हमने पिछले सभी जन्मों में जो भी कर्म किए हैं, हमें उन कर्मों के परिणाम उस जन्म में भी भुगतने होंगे। लेकिन हमें लगता है कि हम हमेशा भगवान का नाम जपते रहते हैं। अगर पूजा का मुख्य उद्देश्य केवल धन, प्रसिद्धि या भौतिक सुख प्राप्त करना है और ये चीजें प्राप्त नहीं होती हैं, तो व्यक्ति दुखी हो जाता है।

प्रेमानंद महाराज इस बात पर जोर देते हैं कि हमने पिछले सभी जन्मों में जो भी कर्म किए हैं, हमें उन कर्मों का फल उस जन्म में भी भुगतना पड़ता है। लेकिन हमें लगता है कि हम हमेशा भगवान का नाम जपते रहते हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी पूजा की तुलना दूसरों की पूजा से करता है और सोचता है कि दूसरों को “ज़्यादा” मिला है, तो उसके अंदर ईर्ष्या और असंतोष पैदा होता है। यह तुलना उसे उसकी भक्ति से दूर ले जाती है और दुख पैदा करती है।

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