बे-क़ुसूरों को  बनाया जा रहा है अपराधी, रालोद ने उठाए यूपी सरकार के जीरो टोरलेंस के दावे पर सवाल 

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लखनऊ:  राज्य सरकार की सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल(रालोद) ने खुद सरकार के जीरो टोरलेंस के दावे पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के अधिकृत ग्रुप में रालोद के प्रदेश सचिव आमिर शाबरी ने आरोप लगाते हुए कहा कि ज़ीरो टोरलेंस का मतलब पुलिस द्वारा बे क़ुसूरों को अपराधी बनाना है। हालांकि रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने घटना से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि किसी के व्यक्तिगत मामले से पार्टी का लेना देना नही है।

प्रदेश सचिव एवं पूर्व प्रवक्ता ने गुरुवार को आरोप लगाते हुए आगे कहा गया है कि उप्र. में ज़ीरो टोरलेंस की सरकार द्वारा बड़े ज़ोर शोर से डुग्गी पीटी जा रही है। जबकि ज़ीरो टोरलेंस की सत्यता यह है कि प्रदेश की पुलिस अपराधियों को थाने में बैठा कर चाय नाश्ते कराती है, और आम अवाम पर फ़र्ज़ी मुक़दमे कर नए नए अपराधी बनाती है। 

उन्होंने फर्रुखाबाद में रालोद के जिला उपाध्यक्ष के भाई जतिन का मामला उठाते हुए कहा कि हरदोई के थाना हरिपालपुर में कुछ नशे में धुत कुछ लोगों ने जतिन के साथ मार पीट की और जब पीड़ित जतिन थाने गया तो उप निरीक्षक अनिल सिंह ने पीड़ित को ही उठा कर बंद कर दिया। 

आगे कहा कि हैरत तो यह कि पीड़ित का भाई, फर्रुखाबाद का रालोद ज़िला उपाध्यक्ष थाने पहुंचा तो उसका मोबाइल भी छीन लिया और बैठा लिया । पुलसिया गुंडागर्दी की इन्तहा तब हुई जब कुछ नेताओं द्वारा क्षेत्राधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया गया तो उसके भी खिलाफ़ 307 में मुक़दमा पंजीकृत कर दिया।

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