हिजबुल्लाह ने इजरायल के साथ किसी भी समझौते पर स्पष्ट किया रुख
तेल अवीव। हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने सोमवार को इजरायल के साथ सीधी बातचीत की मेज पर बैठने से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह का अनुमान लगाने का ‘सवाल ही नहीं पैदा होता’। कासिम ने सशस्त्र प्रतिरोध के प्रति समूह के मजबूत इरादे को फिर से दोहराया। नईम कासिम ने साफ तौर पर कहा, “हम हथियार नहीं छोड़ेंगे, और रक्षा तथा मैदान-ए-जंग ने टकराव के लिए हमारी तैयारी साबित कर दी है।” उन्होंने जोड़ा कि हिजबुल्लाह इजरायली आक्रामकता का जवाब देना जारी रखेगा। उन्होंने लेबनान सरकार की भी आलोचना की और कहा कि सरकार ने ‘रियायत देने में अनावश्यक जल्दबाज़ी की’ है। उन्होंने जोर दिया कि केवल अप्रत्यक्ष बातचीत पर ही विचार किया जाना चाहिए।
ये बयान इजरायल-लेबनान सीमा पर फिर से बढ़ते तनाव के बीच आया है, जबकि वहां अप्रैल के मध्य से अमेरिका की मध्यस्थता वाला संघर्ष विराम लागू है, जिसे हाल ही में बढ़ाया गया है। इस युद्धविराम ने बड़े पैमाने पर लड़ाई को कम तो किया है, लेकिन सीमा पार होने वाले हमलों को पूरी तरह से नहीं रोका जा सका है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन के इल्जाम लगा रहे हैं। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के कई शहरों के लिए नयी निकासी चेतावनी जारी की है, जिसमें बाशिंदों को उन इलाकों से हटने की सलाह दी गई है जिन्हें वह हिजबुल्लाह की गतिविधियों से जुड़ा बता रहा है।
एक इजरायली सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि हिजबुल्लाह लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है और चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो इजरायल पूरी ताकत के साथ जवाब देगा। उधर, हिजबुल्ला ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसकी कार्रवाई बार-बार होने वाले इजरायली उल्लंघनों का ‘वैध जवाब’ है। समूह का दावा है कि संघर्ष विराम समझौते का सैकड़ों बार उल्लंघन हुआ है, जिससे यह नाजुक युद्धविराम कमजोर हो रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी हालिया हमलों के बाद सेना को दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज करने का निर्देश दिया है। इन हमलों में कथित तौर पर कई लोग मारे गये हैं।
इजरायली अधिकारियों का मानना है कि उत्तरी सीमा पर सुरक्षा पक्की करने के लिए सैन्य अभियान ज़रूरी हैं। अमेरिका की मध्यस्थता वाला यह संघर्ष विराम समझौता लगातार हो रही झड़पों और एक-दूसरे पर शर्तों को न मानने के आरोपों के कारण दबाव में है, क्योंकि दोनों ही पक्ष इस युद्धविराम के लंबे समय तक टिकने पर चिंता जता रहे हैं।
