भाबानगर में नवरात्रि की धूम: व्यापार मण्डल का विशाल भंडारा, ‘मंड्याली धाम’ के स्वाद से मंत्रमुग्ध हुए हज़ारों श्रद्धालु
-पारंपरिक पहाड़ी ‘मंड्याली धाम’ का अनूठा स्वाद
भावानगर /किन्नौर| 15 अक्टूबर 2026: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले किन्नौर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र भावानगर में इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व अभूतपूर्व धूमधाम, अटूट श्रद्धा और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर व्यापार मण्डल भावानगर की ओर से आयोजित विशाल भंडारे और महाप्रसाद वितरण कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को भक्ति और उल्लास के रंग में सराबोर कर दिया।

-माता रानी के जयकारों से गुंजायमान हुआ भावानगर
नवरात्रि के पावन दिनों में भावानगर के मुख्य बाजारों और स्थानीय मंदिरों में तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। व्यापार मण्डल के समर्पित सदस्यों एवं स्थानीय निवासियों के विशेष सहयोग से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में पूरे विधि-विधान के साथ माता रानी का पूजन एवं हवन संपन्न किया गया।
हवन-पूजन के उपरांत जैसे ही विशाल भंडारे का शुभारंभ हुआ, भावानगर के साथ-साथ आसपास की पंचायतों व दूर-दराज़ के ग्रामीण इलाकों से हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। माता के भजनों, मंत्रोच्चार और जयकारों की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में बदल गया।
– पारंपरिक ‘मंड्याली धाम’ और सात्विक बंटी का अनूठा स्वाद
पारंपरिक पहाड़ी स्वाद: सात्विक मसालों और विशुद्ध पहाड़ी शैली में तैयार की गई इस धाम की खुशबू और ज़ायके ने हर किसी का मन मोह लिया।सराहना की बौछार: स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ किन्नौर पहुंचे पर्यटकों और अन्य आगंतुकों ने भी इस पारंपरिक व्यंजन का लुत्फ उठाया और इसकी जमकर तारीफ की।
-आपसी भाईचारे और समृद्ध संस्कृति की मिसाल
व्यापार मण्डल भावानगर के पदाधिकारियों ने बताया कि ऐसे धार्मिक व सामाजिक आयोजनों का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और सद्भाव को बढ़ाना है।किन्नौरी आतिथ्य सत्कार और हिमाचल की समृद्ध संस्कृति का यह अनूठा संगम इस वर्ष के नवरात्रि उत्सव को लंबे समय तक यादगार बनाए रखेगा व्यापार मण्डल पदाधिकारी स्थानीय युवाओं और व्यापारियों ने पूरी निष्ठा व सेवा भावना के साथ महाप्रसाद वितरण में सहयोग दिया। अनुशासित पंक्तियों और शांतिपूर्ण माहौल के बीच हज़ारों श्रद्धालुओं ने सहजता से महाप्रसाद ग्रहण किया।
भावानगर का यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि इसने क्षेत्र में आपसी एकता, संस्कृति और निःस्वार्थ सेवा भावना की एक नई मिसाल कायम की है।
