हिमाचल में छह दिन भारी बारिश की चेतावनी, शिमला में भूस्खलन, प्रदेश भर में 150 सड़कें बंद
शिमला, 22 जुलाई। हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की सक्रियता से जमकर बादल बरस रहे हैं। राजधानी शिमला सहित कई इलाकों में मंगलवार रात से रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने 28 जुलाई तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इस दौरान कई स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। राहत की बात यह है कि फिलहाल रेड अलर्ट की चेतावनी नहीं है। हालांकि आज बुधवार के लिए कांगड़ा और मंडी जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि चंबा, कुल्लू, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में येलो अलर्ट रहेगा।
मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों में सबसे अधिक बारिश शिमला जिले के मशोबरा में 117.5 मिलीमीटर दर्ज की गई। इसके अलावा बिलासपुर के नैना देवी में 106.4 मिलीमीटर, ऊना के नंगल डैम में 90 मिलीमीटर, बिलासपुर के ब्रह्माणी में 77 मिलीमीटर, शिमला के कुफरी में 74.2 मिलीमीटर, शिमला शहर में 66.5 मिलीमीटर और बिलासपुर के काहू में 57 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। विभाग का कहना है कि अगले छह दिनों तक कई स्थानों पर भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
लगातार बारिश के कारण प्रदेश में जनजीवन प्रभावित हुआ है। भूस्खलन और मलबा आने से करीब 150 सड़कें बंद हैं, जिनकी बहाली का काम जारी है। कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ है और लोगों से केवल जरूरी होने पर ही यात्रा करने की अपील की गई है।
शिमला में भारी बारिश से दो स्थानों पर भूस्खलन और पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। टूटीकंडी वार्ड के ओल्ड बैरियर क्षेत्र में बुधवार सुबह चार पेड़ मकानों पर गिर गए। इससे घरों की टीन की छतों को नुकसान पहुंचा। समय रहते परिवार के सदस्य घरों से बाहर निकल गए, इसलिए कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से पानी के लगातार रिसाव से जमीन कमजोर हो रही थी और इसकी शिकायत पहले भी की गई थी। दूसरी ओर, लिफ्ट के पास राजीव भवन यानी कांग्रेस कार्यालय के सामने पहाड़ी से छोटे-छोटे पत्थर गिर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। इस मार्ग पर दोनों ओर यातायात फिलहाल सामान्य रूप से चल रहा है, लेकिन प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
कांगड़ा जिले की बोह घाटी में मंगलवार को बादल फटने से हुए नुकसान के बाद राहत और बचाव कार्य जारी है। बाढ़ और भूस्खलन से रूलेहड़, बंगार, गढ़गूंन और स्पैड़ा गांवों में 18 मकान, नौ गोशालाएं और एक प्राथमिक स्कूल मलबे में दब गए। तीन महिलाएं घायल हुई हैं और नौ मवेशियों की मौत हो गई। प्रशासन प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और नुकसान का आकलन करने में जुटा है।
सिरमौर जिले में भी रुक-रुक कर बारिश जारी है। जिले में 17 सड़कें और 23 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। दो दिन बंद रहने के बाद आज से शिक्षण संस्थान फिर खुल रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से मौसम को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की है।
उधर, कुल्लू जिले के आनी, बंजार और निरमंड उपमंडलों में लगातार बारिश, भूस्खलन और सड़कें बंद होने के कारण जिला प्रशासन ने आज सभी सरकारी और निजी स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, महाविद्यालय, आईटीआई तथा अन्य शिक्षण संस्थान बंद रखने के आदेश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। मौसम विभाग और जिला प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा मौसम संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की है।
