राज्यपाल गुरमीत सिंह ने वर्ष 2023 के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गांव सरमोली का किया भ्रमण
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने अपने मुनस्यारी दौरे के दौरान वर्ष 2023 में देश के ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज’ (सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव) पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध सरमोली ग्राम पंचायत का भ्रमण किया। इस दौरान राज्यपाल ने सरमोली के विश्वप्रसिद्ध सामुदायिक पर्यटन (Community Tourism) और होमस्टे मॉडल का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने ग्रामीणों के इस अनूठे प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे स्थानीय सहभागिता, महिला सशक्तीकरण और सतत पर्यटन विकास (Sustainable Tourism) का एक उत्कृष्ट और अनुकरणीय उदाहरण बताया।
ग्रामवासियों, महिला स्वयं सहायता समूहों और होमस्टे संचालकों को इस बड़ी उपलब्धि की बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि सरमोली ने सामुदायिक सहभागिता के दम पर एक ऐसा आत्मनिर्भर मॉडल विकसित किया है, जिसे आज राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। यहां स्थानीय समुदाय, विशेषकर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने पर्यटन को आजीविका और पर्यावरण संरक्षण के साथ बेहद प्रभावी ढंग से जोड़ा है।
राज्यपाल ने सरमोली की स्थानीय महिलाओं द्वारा अपनी लोक संस्कृति, पारंपरिक उत्पादों, पहाड़ी खान-पान और प्राकृतिक धरोहरों को सहेजकर रखने के प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने मातृशक्ति से अपनी इस समृद्ध विरासत के प्रचार-प्रसार को निरंतर जारी रखने का आह्वान किया।
भ्रमण के दौरान राज्यपाल ने क्षेत्र के होमस्टे संचालकों से आमने-सामने मुलाकात की। उन्होंने संचालकों के अनुभवों को सुना और पर्यटन को और बेहतर बनाने के लिए उनके सुझावों व समस्याओं की जानकारी ली।
राज्यपाल ने गर्व के साथ रेखांकित किया कि मुनस्यारी आज उत्तराखंड के पर्यटन मानचित्र पर अपनी एक विशिष्ट और मजबूत पहचान बना चुका है। जिला प्रशासन से मिले आंकड़ों के आधार पर उन्होंने मुनस्यारी के बढ़ते पर्यटन ढांचे की एक झलक भी साझा की।
मुनस्यारी में आवासीय पंजीकृत होमस्टे (नगर क्षेत्र) 120, होटल 32, लॉज एक दर्जन से अधिक, टेंट सुविधाएं (कैंपिंग) 50 से अधिक, गेस्ट हाउस 03
राज्यपाल ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि मुनस्यारी में पर्यटन, संस्कृति, प्रकृति और स्थानीय आजीविका का एक बेहद अनूठा संगम देखने को मिलता है। यहां के होमस्टे, पारंपरिक स्थानीय उत्पाद और सक्रिय महिला स्वयं सहायता समूह न केवल सीमांत क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर एक नई प्रतिष्ठा और पहचान भी दिला रहे हैं।
