नौतपा से पहले भट्टी की तरह तपे उत्तराखण्ड के मैदानी जिले

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देहरादून। ‘नौतपा’ की औपचारिक शुरुआत होने से ठीक पहले ही  उत्तराखंड के मैदानी हिस्सों में सूरज के तीखे तेवर लोगों को बुरी तरह डराने लगे हैं। आमतौर पर मई के महीने में दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पूरे उत्तर भारत की झुलसाने वाली गर्मी और उमस से बचने के लिए सैलानी और स्थानीय लोग पहाड़ों का रुख करते हैं, लेकिन इस बार खुद उत्तराखंड के मैदानी और तराई वाले इलाके किसी भट्टी की तरह तप रहे हैं। भीषण तपिश को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग  के देहरादून केंद्र ने शुक्रवार को राज्य के तमाम मैदानी जिलों के लिए भीषण गर्मी और लू  का ‘येलो अलर्ट’ जारी कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से कई डिग्री ज्यादा रिकॉर्ड किया जा रहा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि दोपहर के समय बाजारों, पर्यटन स्थलों और सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरने लगा है।

मौसम वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि आने वाले 24 से 48 घंटों में इस भीषण और जानलेवा तपिश से स्थानीय लोगों को कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। मौसम विभाग  द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के मुताबिक, उत्तराखंड के प्रमुख मैदानी और औद्योगिक शहरों में गर्मी ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, काशीपुर, उधम सिंह नगर, विकास नगर और कोटद्वार जैसे घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों को फिलहाल इस भीषण गर्मी से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। दोपहर के समय इन मैदानी जिलों में पारा लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा है, जिसके कारण कामकाजी लोगों, स्कूली बच्चों और राहगीरों का जीना मुहाल हो गया है।

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