सदन में ‘संख्या बल’ बनाम ‘परंपरा’: कार्य मंत्रणा समिति में विपक्ष की अनदेखी का आरोप; नेता प्रतिपक्ष बोले— “बहुमत के आधार पर तय हो रहा एजेंडा”

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भराड़ीसैंण, 11 मार्च । उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान संसदीय परंपरा और कार्य संचालन को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच मंगलवार को तीखी बहस हुई। सदन में विशेष रूप से राज्यपाल के अभिभाषण और कार्य मंत्रणा समिति के एजेंडा को लेकर विपक्ष और राज्य के संसदीय मंत्री सुबोध उनियाल के बीच तीखी बहसहुई। विपक्ष ने समिति में भागीदारी और सदन में निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने सदन में कहा कि विपक्ष सदन के नियमों का पालन नहीं कर रहा है और इसे गंभीर रूप से देखा जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष यशलाल आर्य ने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति में विपक्ष की पारंपरिक भागीदारी हमेशा रही है, लेकिन वर्तमान में यह परंपरा टूट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति में तय एजेंडा बहुमत के आधार पर तय किया जा रहा है, जिससे सदन में गतिरोध उत्पन्न हो रहा है।

विधानसभा के सदस्य मुन्ना सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि विपक्ष कांग्रेस सदन की कार्यवाही को अपमानित कर रही है और सदन को बार-बार बाधित किया जा रहा है। कांग्रेस के सदस्य प्रीतम सिंह ने कहा कि सदन का संचालन नियमावली के अनुसार होना चाहिए, लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से भाग रही है।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि विपक्ष ने सदन में ‘गुंडागर्दी’ शब्द का प्रयोग किया, जो अनुचित है। सदस्य

काजी निजामुद्दीन ने सुझाव दिया कि अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी पीठ से दिए जाने वाले निर्देशों के लिए पुस्तक तैयार की जाए, जिससे संसदीय प्रक्रिया में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित किया जा सके। सदन में यह बहस लगभग दो घंटे तक जारी रही और विपक्ष तथा सरकार के बीच पारंपरिक संसदीय परंपरा और नियमों को लेकर मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए।

कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन ने कहा कि उत्तराखंड बलिदानियों के सपनों का राज्य है और सरकार को मनमानी के बजाय राज्यहित में कदम उठाने चाहिए। भाजपा के सदस्य बिनोद चमोली ने आरोप लगाया कि विपक्ष कांग्रेस समिति में शामिल नहीं हो पा रही है और सदन में सरकार की आलोचना मनमानी तरीके से की जा रही है। सदन में

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में विपक्ष की हमेशा सहभागिता रही है, लेकिन सत्ता पक्ष संख्या बल के आधार पर एजेंडा तय कर लेता है। उन्होंने बताया कि इस कारण विपक्ष ने समिति से इस्तीफा दिया है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि जब तक इस्तीफा स्वीकार नहीं होता, इस्तीफा देने वाले सदस्य समिति में बने रहेंगे। पीठ ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह से कहा कि वे कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में शामिल हों ताकि उनके अनुभवों का लाभ लिया जा सके।

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