शिमला पुलिस में हड़कंप: बालूगंज थाने में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और मामले दबाने पर FIR दर्ज

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शिमला, 05 फ़रवरी। राजधानी शिमला में कुछ आपराधिक मामलों को समय पर अदालत में पेश न किए जाने और पुलिस रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के मामले में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुलिस थाना बालूगंज शिमला से जुड़े कई मामलों को जानबूझकर दबाकर रखा गया।

रिकॉर्ड में कथित रूप से बदलाव किए गए और तय समय सीमा के भीतर अदालतों में चालान पेश नहीं किए गए। इसके कारण कई मामले समय सीमा समाप्त होने की वजह से स्वतः समाप्त (लिमिटेशन के कारण खारिज) हो गए।

पुलिस अधीक्षक शिमला कार्यालय से जारी आदेश के आधार पर इस मामले की जांच आगे बढ़ाई गई। आदेश में बताया गया कि कुछ मामलों में गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद प्रारंभिक जांच और एक समिति की रिपोर्ट तैयार कराई गई। जांच रिपोर्ट में पुलिस रिकॉर्ड में कथित जालसाजी, मामलों को दबाने और कानूनी प्रक्रिया में लापरवाही जैसी बड़ी खामियां सामने आईं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित मामलों के चालान समय पर अदालत में प्रस्तुत नहीं किए गए इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई और कई मामले कानूनी समय सीमा पार होने के कारण आगे नहीं बढ़ सके। इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों को उचित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

इसी के तहत भारतीय दंड संहिता की धाराओं 204, 217, 218, 465 और 467 सहित अन्य संबंधित धाराओं में पुलिस थाना बालूगंज शिमला में मामला दर्ज किया गया है। मामला आधिकारिक रिकॉर्ड में कथित जालसाजी, आपराधिक मामलों को दबाने और सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ से संबंधित है।

पुलिस के एक अधिकारी ने गुरूवार को बताया कि दर्ज एफआईआर के आधार पर अब मामले की विस्तृत जांच की जाएगी और जांच के दौरान जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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