हिमाचल पुलिस एक्ट में संशोधन को राष्ट्रपति से मिली मंजूरी, अब सरकारी कर्मचारी की बिना अनुमति गिरफ्तारी नहीं

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शिमला: हिमाचल सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों की सरकारी काम में लापरवाही या गलती पर अब पुलिस उन्हें सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। इसके लिए पहले राज्य सरकार ने अनुमति लेनी होगी। यह सुरक्षा कवर क्रिमिनल मामलों के लिए नहीं होगा। दरअसल, राज्य सरकार ने पब्लिक सर्वेंट्स के लिए पुलिस एक्ट में संशोधन करते हुए विधानसभा की शीतकालीन सत्र में एक विधेयक रखा था। इसे अब राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के बाद विधि सचिव ने इसे नोटिफाई कर दिया है, जिससे यह अब कानून के रूप में लागू हो गया है। इसके तहत पुलिस एक्ट 2007 की चार धाराओं को बदला गया है। इसमें धारा 4, 25, 65 और 95 शामिल हैं।

धारा 4 में संशोधन हुआ है कि अब ग्रेड 2 के राजपत्रित पुलिस अधिकारियों की भर्ती स्टेट कैडर में ही होगी। धारा 25 में एक संशोधन है कि पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी में नियुक्ति के लिए सेशन जज से अधीनस्थ न्यायालय से भी नियुक्ति की जा सकेगी। धारा 95 में किए गए संशोधन में कहा गया है कि यदि उपरोक्त वर्णित पंक्ति में के सेवानिवृत पत्र अधिकारी नहीं है, तो राज्य सरकार स्थिति और उपलब्धता के आधार पर किसी भी कनिष्ठ सेवानिवृत अधिकारी को नॉमिनेट कर सकेगी। धारा 65 में एक संशोधन किया गया है कि कोई भी पुलिस अधिकारी सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना किसी भी पब्लिक सर्वेंट को उसके द्वारा लोक सेवक के रूप में कार्य के चलते समय किए गए काम के लिए गिरफ्तार नहीं करेगा।

कोर्ट ने कहा था, सरकारी कर्मियों को संरक्षण दो
विधानसभा में रखे विधेयक के कारणों और उद्देश्यों में सरकार ने कहा था कि उच्च न्यायालय ने कोर्ट ओन इट्स ओन मोशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एंड अदर के आदेश में पब्लिक सर्वेंट को प्रोटेक्शन देने के लिए प्रस्ताव पर विचार करने को कहा था। सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों को निडर होकर अपना कत्र्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम बनाने के लिए उन्हें एकदम गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान करने की जरूरत है, इसलिए यह संशोधन किया गया। विधानसभा में हालांकि भाजपा विधायकों ने इस संशोधन का विरोध किया था।

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