जुलाई डेडलाइन तय, स्कीम लागू नहीं करने पर केंद्र नहीं जारी करेगा पैसा
शिमला। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह लागू की गई वीबी जीराम जी योजना को लेकर डेडलाइन तय कर दी गई है। भारत सरकार ने जुलाई तक इस योजना पर अंतिम फैसला लेने की बात कही है। यदि जुलाई तक फैसला नहीं लिया, तो न सिर्फ अगला पैसा रखेगा, बल्कि पुरानी लायबिलिटी को भी केंद्र सरकार अदा नहीं करेगी। हिमाचल के अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी इस बात को साफ कर दिया गया है। हालांकि हिमाचल को कई तरह की आपत्तियां नई योजना से हैं। इन्हीं आपत्तियां पर चर्चा को कैबिनेट ने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री की अध्यक्षता में कमेटी बना रखी है।
इस कमेटी को 29 जून तक रिपोर्ट देने को कहा गया था। अधिकारियों का कहना है कि हिमाचल सरकार नई योजना को लागू कर रही है, लेकिन इससे पहले केंद्र सरकार को अपनी आपत्तियों से संबंधित ज्ञापन भेजा जा रहा है। नई योजना में न सिर्फ मनरेगा में मिलने वाली दिहाड़ी का मसला है, बल्कि इस योजना के लिए हिमाचल में नियुक्त किए गए करीब 1200 कर्मचारियों की वेजिज को लेकर भी दिक्कत है। हिमाचल सरकार मनरेगा में 320 रुपए दे रही है, जबकि केंद्र सरकार की दिहाड़ी 247 रुपए है। मनरेगा में राज्य सरकार टॉप अप करके भुगतान कर रही थी। यह टॉप अप सुविधा वीबी जीराम जी में भी रहेगी या नहीं? इस पर निर्णय अभी होना है।
हिमाचल पर आर्थिक बोझ
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने प्रेस वार्ता कर अन्य आपत्तियों को भी उजागर किया था। इस योजना से हिमाचल प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। नई व्यवस्था का प्रतिकूल असर ग्रामीण मजदूरों की आजीविका, रोजगार के अवसरों और मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ेगा। अनिरुद्ध सिंह ने कहा था कि केंद्र सरकार नई योजना के फायदे तो बता रही है, लेकिन इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा नहीं कर रही है। ग्रामीण विकास मंत्री ने ये तर्क भी दिया था कि नई योजना के लागू होने के बाद मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में गैर-जनजातीय क्षेत्रों में मजदूरी सिमटकर 247 रुपए और जनजातीय क्षेत्रों में 309 रुपए रह जाएगी।
