प्रधानमंत्री ने महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर दी श्रद्धांजलि, 200वीं जयंती समारोह की शुरुआत

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नई दिल्ली, 11 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी 200वीं जयंती समारोह की औपचारिक शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने महात्मा फुले को एक दूरदर्शी समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन समानता, न्याय और शिक्षा के आदर्शों को समर्पित किया।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर शनिवार को कहा कि महात्मा फुले महिलाओं और वंचितों के अधिकारों के प्रबल पक्षधर थे और उन्होंने शिक्षा को सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी साधन बनाया। आज भी फुले के विचार समाज की प्रगति के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने हिंदी, गुजराती और मराठी समेत तामाम भाषाओं में अलग-अलग पोस्ट में कहा कि महात्मा ज्योतिराव समानता, न्याय और शिक्षा के आदर्शों के लिए समर्पित दूरदर्शी समाज सुधारक थे। उन्होंने महिलाओं और वंचितों के अधिकारों की पैरवी की और शिक्षा को सशक्तिकरण का साधन बनाया। इस वर्ष हम उनकी 200वीं जयंती समारोह की शुरुआत कर रहे हैं। उनके विचार समाज की प्रगति के लिए हमें मार्गदर्शन देते रहें।

उल्लेखनीय है कि महात्मा ज्योतिराव फुले को लोकप्रिय रूप से महात्मा फुले के नाम से जाना जाता है। वह 19वीं सदी के भारत के प्रमुख सामाजिक सुधारकों में से एक थे। उन्होंने अपना जीवन सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं को समाप्त करने के लिए समर्पित किया। उन्होंने 1873 में ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शोषण को रोकना और भेदभावपूर्ण प्रथाओं से पीड़ितों को मुक्ति दिलाना था। वह साल 1876 से 1882 तक पुणे नगर पालिका के सदस्य रहे और 1888 में गरीबों एवं वंचितों की मुक्ति में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘महात्मा’ तथा ‘भारत के बुकर टी. वॉशिंगटन’ की उपाधियों से सम्मानित किया गया।

संसद भवन परिसर में स्थापित महात्मा ज्योतिराव फुले की 12 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा, जिसका निर्माण राम वी. सुतार द्वारा किया गया था और जिसका अनावरण 3 दिसंबर 2003 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किया गया था, वर्तमान में परिसर के भीतर प्रेरणा स्थल पर स्थित है।

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