जिलाधिकारी के प्रयासों ने बदली बेसहारा बच्चों की तकदीर

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देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल के संवेदनशील एवं दूरदर्शी प्रयासों से सड़क पर भटकता और भिक्षावृत्ति व बालश्रम में संलिप्त बचपन अब शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने लगा है। जिला प्रशासन के संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर ऐसे बच्चों के जीवन में नई आशा की किरण बनकर उभरा है। कभी मुरझाए हुए चेहरों पर अब त्योहारों की खुशियां दिखाई दे रही हैं। उनकी आंखों में भविष्य के सुनहरे सपने संजोए जा रहे हैं। आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में न केवल उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है, बल्कि उनके भविष्य की स्पष्ट दिशा भी तय की जा रही है।

जिला प्रशासन की इस अभिनव पहल के तहत अब तक 174 से अधिक बच्चों को भिक्षावृत्ति एवं बाल श्रम से मुक्त कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। रेस्क्यू अभियान के माध्यम से चिन्हित बच्चों को आधुनिक केयर सेंटर में लाकर काउंसलिंग, ब्रिज कोर्स, नियमित शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण एवं मानसिक संबल प्रदान किया जा रहा है। हारिश, कक्षा 6, साधुराम इंटर कॉलेज का छात्र है। वह शारीरिक रूप से अत्यंत सक्रिय है और सभी प्रकार की खेल गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेता है।

वह मई माह 2025 में आईसीसी से जुड़ा था। उससे पहले वह किसी भी विद्यालय में नामांकित नहीं था और उसे औपचारिक स्कूली शिक्षा का पूर्व अनुभव भी नहीं था। आईसीसी से जुड़ने के बाद अगस्त 2025 माह में उसे कक्षा 6 में साधुराम इंटर कॉलेज में मुख्यधारा में प्रवेश दिलाया गया। विद्यालय में प्रवेश के पश्चात उसने नियमित उपस्थिति दर्ज कराई है तथा प्रत्येक खेल गतिविधि में उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी सक्रियता और प्रतिभा का उत्कृष्ट परिचय दिया है।

जिलाधिकारी के निर्देशन में संबंधित विभागों की समन्वित कार्यवाही से इन बच्चों को औपचारिक विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जा रहा है। इसके साथ ही सेंटर में संगीत, योग, खेलकूद एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हाल ही में सेंटर के बच्चों ने उत्साहपूर्वक होली का पर्व मनाया। रंगों के साथ खिलखिलाती हंसी यह संदेश दे रही थी कि अब यह बचपन उपेक्षा का नहीं, बल्कि अवसरों का प्रतीक है। तीज-त्योहारों में सहभागिता से बच्चों में आत्मविश्वास एवं सामाजिक जुड़ाव की भावना विकसित हो रही है।

जिला प्रशासन द्वारा निरंतर रेस्क्यू अभियान चलाकर बालश्रम एवं भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चों की पहचान की जा रही है। ऐसे बच्चे जो पारिवारिक, आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण इन गतिविधियों में संलिप्त थे, उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान कर शिक्षा और कौशल विकास की दिशा में अग्रसर किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने कहां कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और शिक्षित जीवन का अधिकार है। प्रशासन का उद्देश्य केवल बच्चों को रेस्क्यू करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी नागरिक बनाना है। आज जो बच्चे कभी सड़कों पर थे, वही अब विद्यालयों में नियमित रूप से अध्ययन कर रहे हैं, खेल प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। उनकी बदलती जिंदगी अन्य जरूरतमंद बच्चों और समाज के लिए प्रेरणा बन रही है। जिला प्रशासन की यह पहल समाज के सहयोग से और अधिक सशक्त रूप से आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा और सम्मानजनक जीवन से वंचित न रहे।

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