इंसाफ में देरी, न्याय संकल्पना का विनाशः चीफ जस्टिस सूर्यकांत

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मुंबई: देश के चीफ जस्टिस, सूर्यकांत ने भारतीय न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों और उनकी वजह से होने वाली देरी पर कड़े शब्दों में टिप्पणी की है। उन्होंने अपनी राय ज़ाहिर करते हुए कहा कि न्याय मिलने में देरी सिर्फ़ अन्याय नहीं, बल्कि न्याय की संकल्पना का पूरी तरह से विनाश होना है।

बॉम्बे हाई कोर्ट में आयोजित अपने सम्मान समारोह में चीफ़ जस्टिस बोल रहे थे। देश की अदालतों में इस समय लाखों मामले लंबित हैं। कई मामले 20 से 25 साल तक चलते हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि आम नागरिकों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता। न्याय सिर्फ एक आखिरी फ़ैसले तक सीमित नहीं है, इसे समय पर मिलना भी उतना ही ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि संविधान के आर्टिकल 226 के तहत दी गई अंतरिम राहत कई मामलों में आखिरी फ़ैसले की तरह होती है। किसी छोटे किसान या किसी विद्यार्थी को, जिसका एडमिशन नहीं हुआ है, अंतरिम राहत देना उनके लिए बहुत बड़ा इंसाफ हो सकता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट को सिर्फ केस आने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि खुद ही गवर्नेंस सिस्टम में कमियों का पता लगाकर उन पर एक्शन लेना चाहिए। उन्होंने ऐसे हाई कोर्ट के उदाहरण भी दिए जिन्होंने पहले भी पर्यावरण, कैदियों के अधिकारों और देश के संकट के समय प्रवासी और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है।

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