चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के समाधि दिवस पर आचार्य श्री को किया नमन

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देहरादून: जैन सद्भावना परिषद देहरादून द्वारा दिगंबर जैन मंदिर सरनीमल हाउस पर आयोजित कार्यक्रम में दिगंबर जैन परंपरा को उत्तर भारत में पुनर्जीवित करने वाले चारित्र चक्रवर्ती परम पूज्य आचार्य श्री शांति सागर जी महा मुनिराज को श्रद्धा स्वरूप नमन किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री अभिनंदन प्रसाद जैन ने की तथा संचालन कार्यक्रम संयोजक श्री पंकज जैन द्वारा किया गया, कार्यक्रम का प्रारंभ महामंत्र णमोकार के पाठ से किया गया


डॉ संजीव जैन ने आचार्य श्री को नमन करते हुए बताया कि आचार्य श्री का जन्म वर्ष 1872 मैं हुआ तथा समाधि वर्ष 1955 मे हुई। शांतिसागर जी ने उत्तर भारत में पारंपरिक दिगंबर प्रथाओं की शिक्षा और अभ्यास को पुनर्जीवित किया । धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने और कई तीर्थयात्राओं से गुजरने के बाद शांतिसागर जी ने अपना जीवन धर्म को समर्पित करने का फैसला किया ।
जैन सद्भावना परिषद के मुख्य संयोजक श्री सुनील कुमार जैन ने कहा कि आचार्य शांति सागर जी महाराज ने ब्रिटिश राज में दिगंबर संतों पर लगाए गए प्रतिबंधों का विरोध करने के लिए भूख हड़ताल शुरू की। 8 सितंबर 1955 को आचार्य शांतिसागर जी ने 35वें/36वें दिन उपवास के बाद उत्कर्ष समाधिमरण प्राप्त किया।

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