उत्तराखंड के स्कूलों में शुरू हुआ श्लोक वाचन, पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेंगे श्रीमद्भगवद्‌ गीता और रामायण

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देहरादूनः उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों की प्रार्थना सभा में अच्छी पहल होने जा रही है। जिसमें विद्यार्थियों को श्रीमद् भगवद्गीता का एक श्लोक अर्थ सहित प्रतिदिन सुनाया जाएगा। ताकि आधुनिक शिक्षा के साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा से छात्रों को अवगत कराकर उन्हें एक श्रेष्ठ नागरिक बनाया जा सके।

उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती द्वारा मुख्य शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में जारी एक आदेश में कहा गया है कि प्रार्थना सभा में सुनाए जाने वाले इस श्लोक के वैज्ञानिक दृष्टिकोण की जानकारी भी छात्रों को दी जाएगी । इसके अलावा शिक्षकों को प्रत्येक सप्ताह गीता के एक श्लोक को सप्ताह का श्लोक घोषित कर उसे सूचना पट्ट पर अर्थ सहित लिखे जाने को कहा गया है। जिसका छात्र अभ्यास करेंगे और सप्ताह के अंत में उस पर चर्चा कर उसका फीडबैक लिया जाएगा।

आदेश में कहा गया है कि विद्यालय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि छात्रों को ये श्लोक केवल विषय या पठन सामग्री के रूप में नहीं पढ़ाए जाएं बल्कि ये उनके जीवन एवं व्यवहार में भी परिलक्षित हों। सती ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार एवं ज्ञान प्रणाली का अध्ययन कराया जाना है। इससे पहले उत्तराखंड में राज्य पाठ्यचर्या को लेकर छह मई को आयोजित एक बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीमद् भगवद्गीता और रामायण को भी इसमें शामिल करने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों पर श्रीमद् भगवद्गीता तथा रामायण को भी राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा में शामिल कर लिया गया है और इसके अनुरूप पाठ्य पुस्तकें आगामी शैक्षिक सत्र से उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है।

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