विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को दया नहीं, सम्मान और अवसर चाहिए: राज्यपाल गुरमीत सिंह

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देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने झाझरा स्थित आईटीआईटीआई दून संस्कृति स्कूल में आयोजित “विशिष्ट अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया) एवं ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के मैपिंग अभियान” का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को दया नहीं, बल्कि सम्मान, सहयोग और अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने कहा कि किसी बच्चे की कठिनाई को उसकी कमी के रूप में नहीं, बल्कि उसकी विशेष आवश्यकता के रूप में समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “किसी बच्चे की कठिनाई को उसकी पहचान मत बनाइए, उसकी क्षमता को उसकी पहचान बनाइए।” उन्होंने समावेशी, संवेदनशील और अवसरों से परिपूर्ण उत्तराखंड के निर्माण का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि मैपिंग अभियान का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे की समय पर पहचान कर उसे उचित परामर्श, विशेषज्ञ सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना होना चाहिए। 21वीं सदी को तकनीक की सदी बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से दिव्यांग बच्चों को आवश्यक सहायता के साथ शिक्षा और विकास के नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए मजबूत सहयोग तंत्र विकसित करने में परिवार, विद्यालय, विशेषज्ञ और प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन सभी के समन्वित प्रयासों से बच्चों को बेहतर अवसर दिए जा सकते हैं। उन्होंने पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक भी समय पर विशेषज्ञ सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

राज्यपाल ने पूर्व सांसद एवं डिस्लेक्सिया सोसायटी उत्तराखंड के अध्यक्ष तरुण विजय के पिछले करीब 25 वर्षों से हिमालयी और उत्तर भारत के जनजातीय बच्चों को शिक्षा एवं अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों के लिए विद्यालय की स्थापना सेवा, संवेदना और राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य है।

विद्यालयों में 200 शिक्षकों की नियुक्ति
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों के लिए 200 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। उन्होंने इसे समावेशी शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों की क्षमताओं को पहचानकर उनके विकास को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन में शिक्षा के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय सुधार हुए हैं।

पूर्व सांसद एवं डिस्लेक्सिया सोसायटी उत्तराखंड के अध्यक्ष तरुण विजय ने कहा कि प्रदेश में दिव्यांग बच्चों की पहचान, शिक्षा, उपचार और पुनर्वास के क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने अभियान को प्रदेश के प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रम में एनआईईपीवीडी के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र धालवाल ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, शिक्षण एवं सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए। शिवानी कोटनाला ने अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों, अभिभावकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे।

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