हिमाचल के ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी से बढ़ी ठंड, साच पास बंद; 30 सितंबर से मौसम शुष्क रहने के आसार

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शिमला: हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में सोमवार रात हुई बारिश और बर्फबारी के बाद ठंड बढ़ गई है। चंबा जिले में साच पास के आसपास करीब एक फुट ताजा बर्फ गिरने से मार्ग वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हो गया है। प्रशासन ने लोगों से साच पास की ओर नहीं जाने की अपील की है। जनजातीय जिलों लाहौल-स्पीति और किन्नौर में भी बारिश-बर्फबारी के बाद शीतलहर जैसी स्थिति बनी हुई है।

मंगलवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहा और धूप खिलने से लोगों ने राहत की सांस ली। मौसम विभाग के अनुसार आज कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है, इसके बाद 30 सितंबर से 5 अक्टूबर तक राज्य में मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान है। इस बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और हिमाचल से मानसून की आधिकारिक विदाई की घोषणा अभी बाकी है।

बारिश और बर्फबारी का असर मंगलवार के न्यूनतम तापमान पर भी दिखाई दिया। राज्य में न्यूनतम तापमान औसतन सामान्य से 0.9 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। जनजातीय क्षेत्र केलांग में न्यूनतम तापमान 4.1 डिग्री, ताबो में 4.3 डिग्री और कुकुमसेरी में 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कल्पा में न्यूनतम तापमान 6.1 डिग्री रहा। कुफरी में 9.7 डिग्री, मनाली में 11.1 डिग्री और शिमला में 11.6 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड हुआ।

बीते 24 घंटे में जुब्बड़हट्टी में सबसे ज्यादा 64.4 मिलीमीटर बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में बारिश हुई। शिमला जिला के जुब्बड़हट्टी में 64.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। कांगड़ा के घमरूर में 42.2 मिलीमीटर, धर्मपुर में 39.6 मिलीमीटर, कसौली में 38 मिलीमीटर और सोलन में 26.8 मिलीमीटर और शिमला शहर में 25.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इस दौरान शिमला, कांगड़ा और मुरारी देवी में गरज के साथ बिजली चमकने की घटनाएं भी दर्ज की गईं। हमीरपुर के नेरी में अधिकतम तेज हवा की गति 37 किलोमीटर प्रति घंटा और लाहौल स्पीति के ताबो में 31 किलोमीटर प्रति घंटा रही।

मानसून की वापसी की प्रक्रिया जारी

मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की रेखा इस समय 32.5 डिग्री उत्तर और 72.5 डिग्री पूर्व से गुजर रही है। यह रेखा गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा, नलिया और 23 डिग्री उत्तर व 67.8 डिग्री पूर्व तक बनी हुई है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में समुद्र तल से करीब 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है।

हिमाचल प्रदेश से मानसून की आधिकारिक वापसी की घोषणा अभी नहीं हुई है। राज्य में अगले एक सप्ताह तक मौसम के शुष्क रहने के पूर्वानुमान और मानसून की वापसी की आगे बढ़ती प्रक्रिया को देखते हुए अब इसकी विदाई की घोषणा का इंतजार है।

मानसून में 373 लोगों की मौत, 3,220 करोड़ रुपये का नुकसान

इस मानसून सीजन में बारिश से जुड़े हादसों में अब तक प्रदेश में 373 लोगों की मौत हो चुकी है। चार लोग लापता हैं और 623 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में 221 की जान सड़क हादसों में गई है, जबकि 152 मौतें भूस्खलन, अचानक बाढ़, डूबने, बहने, फिसलने और बारिश से जुड़े अन्य हादसों में हुई हैं। मानसून के दौरान 581 मवेशियों की भी मौत हुई है।

राज्य में मानसून से करीब 3,220 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। इस दौरान 146 मकान पूरी तरह और 530 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। 18 दुकानें, छह घराट और 497 पशुशालाएं भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं।

लोक निर्माण विभाग को सड़कों और पुलों को हुए नुकसान से करीब 2,744 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है।

61 सड़कें बंद, 126 ट्रांसफार्मर और छह पेयजल योजनाएं प्रभावित

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार मंगलवार सुबह तक प्रदेश में भूस्खलन के कारण 61 सड़कें बंद थीं। 126 बिजली ट्रांसफार्मर और छह पेयजल योजनाएं भी ठप रहीं। मंडी में 28, कांगड़ा में छह, कुल्लू में पांच, किन्नौर में पांच और सिरमौर में पांच सड़कें अवरुद्ध हैं।

बिजली आपूर्ति पर भी बारिश और भूस्खलन का असर पड़ा है। मंडी जिले के गोहर और सुंदरनगर में 84, किन्नौर में 21, शिमला जिले के ठियोग और रामपुर में 17 तथा चंबा के भरमौर में चार ट्रांसफार्मर खराब हैं। इनके कारण संबंधित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। शिमला जिले के रामपुर में छह पेयजल योजनाएं भी ठप हैं।

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