हिमाचल में बैंक हड़ताल का असर, करोड़ों का कारोबार प्रभावित

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शिमला, 27 जनवरी । देशभर में मंगलवार को हुई एक दिवसीय बैंक हड़ताल का असर हिमाचल प्रदेश में भी देखने को मिला। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों में कामकाज ठप रहा, जिससे करोड़ों रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। नकद निकासी, जमा, चेक क्लियरेंस और अन्य बैंकिंग सेवाएं बाधित रहने से आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

यह हड़ताल संयुक्त मोर्चा यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) के आह्वान पर की गई। हड़ताल के तहत राजधानी शिमला में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाज़ी की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बैंककर्मी शामिल हुए और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर सरकार के प्रति नाराज़गी जताई।

धरने के दौरान यूएफबीयू हिमाचल प्रदेश इकाई के संयोजक नरेंद्र शर्मा ने कहा कि बैंक कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से सरकार के पास लंबित हैं, लेकिन उन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रमुख मांगों में वेतन समझौते में हो रही देरी को समाप्त करना, सभी बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण पर रोक लगाना, आउटसोर्सिंग बंद करना और बैंकों में पर्याप्त भर्ती करना शामिल है।

नरेंद्र शर्मा ने कहा कि बैंकिंग व्यवस्था देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो बैंक कर्मचारी अपना आंदोलन और तेज करेंगे।

हड़ताल के कारण शिमला की कई बैंक शाखाओं में पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। ग्राहकों को खाली हाथ लौटना पड़ा और खासकर बुजुर्गों तथा दूर-दराज़ से आए लोगों को ज्यादा दिक्कतें हुईं। बैंक यूनियनों का कहना है कि उनका मकसद जनता को परेशान करना नहीं बल्कि सरकार का ध्यान बैंक कर्मचारियों की जायज़ मांगों की ओर आकर्षित करना है।

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