संविधान केवल ग्रंथ नहीं, जीवंत मार्गदर्शक है : ऋतु खंडूड़ी भूषण

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देहरादून, 26 जनवरी । विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस पर विधानसभा में तिरंगा फहराया। इस अवसर पर उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और देश की एकता–अखंडता के प्रति निष्ठा बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि संविधान केवल ग्रंथ नहीं, जीवंत मार्गदर्शक है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज ही के दिन, वर्ष 1950 में भारत ने अपने संविधान को अंगीकार किया था। संविधान की उद्देशिका में स्पष्ट रूप से उल्लेख है: “हम भारत के लोग इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”

उन्होंने कहा कि इसका आशय यह है कि भारत के नागरिकों ने स्वयं अपना संविधान बनाया, स्वयं उसे विधि का स्वरूप दिया और स्वयं को उसके प्रति समर्पित किया। अपने भविष्य एवं कल्याण के संबंध में निर्णय लेने की यही शक्ति ‘गण’ अर्थात जनता की सर्वोच्च शक्ति है। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान केवल अनुच्छेदों और अनुसूचियों का एक कागजी संकलन मात्र नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत, सर्वहितकारी मार्गदर्शक है, जिसकी संरक्षण छाया में भारत ने निरंतर प्रगति की है।

उन्होंने संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब की दूरदृष्टि और महान प्रतिभा का ही परिणाम है कि आज समाज का प्रत्येक वर्ग सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन सका है।

विधानसभा अध्यक्ष ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन वीर सेनानियों का बलिदान इतना महान है कि देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।

इस अवसर पर रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ, सचिव विधायी धनंजय चतुर्वेदी, प्रभारी सचिव विधानसभा हेम पंत, विशेष कार्याधिकारी अशोक शाह, विनोद रावत, विशाल शर्मा, हरीश रावत, लक्ष्मी उनियाल, मयंक सिंघल, चन्द्रेश गौड़ सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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