पंजाब में सैनिक स्कूल कपूरथला के वार्षिकोत्सव में शामिल हुए राज्यपाल गुरमीत सिंह

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देहरादूनः राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह ने आज पंजाब में सैनिक स्कूल कपूरथला के वार्षिकोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर राज्यपाल ने कैडेट्स के हॉस्टल, मैस आदि का भ्रमण कर अपनी पुरानी यादों को साझा किया। गौरतलब है कि राज्यपाल ने इसी स्कूल से अपनी शिक्षा प्राप्त की है। वार्षिकोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सैनिक स्कूल कपूरथला केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण और नेतृत्व विकास की प्रयोगशाला है।

उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूल कपूरथला उनके जीवन की दिशा निर्धारित करने वाला संस्थान रहा है। इसी परिसर में उन्होंने अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा के मूल संस्कार आत्मसात किए, जिन्होंने उन्हें भारतीय सेना में सेवा के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल ने कहा कि सैनिक स्कूलों का उद्देश्य ऐसे युवाओं का निर्माण करना है, जो राष्ट्र को सर्वाेपरि रखें और राष्ट्रीय सुरक्षा में अपना योगदान दें। सैनिक स्कूल कपूरथला ने इस उद्देश्य को सफलतापूर्वक साकार करते हुए सशस्त्र सेनाओं को अनेकों उत्कृष्ट अधिकारी प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय को कई बार ‘रक्षा मंत्री ट्रॉफी’ से सम्मानित किए जाने को उसकी शैक्षणिक एवं सैन्य उत्कृष्टता का प्रमाण बताया। युवा कैडेट्स को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज का वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और आधुनिक युद्ध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, सूचना तंत्र और तकनीक आज राष्ट्रीय सुरक्षा के नए आयाम बन चुके हैं। उन्होंने कैडेट्स से शैक्षणिक, तकनीकी और बौद्धिक क्षमता के समग्र विकास पर बल देने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बल आत्मनिर्भरता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, आधुनिक हथियार प्रणालियों और संयुक्त कमान जैसी पहलों के माध्यम से नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी राष्ट्रहित में प्रभावी होती है जब उसका संचालन मजबूत चरित्र और उच्च नैतिक मूल्यों से हो। सत्यनिष्ठा, साहस, अनुशासन और नेतृत्व-यही सैनिक स्कूलों की सबसे बड़ी देन है। राज्यपाल ने कैडेट्स के अभिभावकों एवं शिक्षकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनका त्याग, धैर्य और विश्वास ही इन बच्चों को राष्ट्र सेवा के लिए तैयार करता है।

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