राज्यपाल ने किया माउंट एवरेस्ट अभियान के वीर पर्वतारोहियों और एनसीसी कैडेट्स को सम्मानित

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देहरादूनः राजभवन में शनिवार को आयोजित सम्मान कार्यक्रम में राज्यपाल ले.ज. गुरमीत सिंह ने माउंट एवरेस्ट अभियान 2025 में सफलतापूर्वक चढ़ने वाले भारतीय सेना के वीर पर्वतारोहियों और एनसीसी कैडेट्स को सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने सभी प्रतिभागियों को उनके साहस, जज्बे और बुलंद इरादों के लिए बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि पूरे देश और विशेष रूप से उत्तराखण्ड के लिए गर्व का विषय है। कार्यक्रम में राज्यपाल ने एनसीसी के सीनियर अंडर ऑफिसर विनायक ठाकुर को भी सम्मानित किया जिन्होंने युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां उन्हें ओवरऑल बेस्ट कैडेट के पदक से नवाजा गया।

गौरतलब है इस वर्ष के माउंट एवरेस्ट दो अलग-अलग अभियानों के अंतर्गत, भारतीय सेना के पहले अभियान में सम्मिलित 22 पर्वतारोहियों में से 10 उत्तराखण्ड राज्य से थे, जो इस देवभूमि की गौरवशाली पर्वतारोहण परंपरा को दर्शाता है। इसके अलावा एनसीसी के दूसरे पर्वतारोहण अभियान में 10 एनसीसी कैडेट्स में से उत्तराखण्ड के तीन कैडेट्स ने माउंट एवरेस्ट की चोटी को फतह किया जिन्होंने विश्व की सबसे ऊँची चोटी पर तिरंगा फहराकर देश एवं प्रदेश का नाम रोशन किया।

सम्मान समारोह में राज्यपाल ने कहा कि अभियान न केवल ऊँचाई को छूने की यात्रा थी, बल्कि यह मानसिक दृढ़ता, रणनीतिक योजना और कठोर प्रशिक्षण का फल है। उन्होंने सेना की इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सेना हर क्षेत्र में चाहे वह युद्ध हो, आपदा राहत हो या पर्वतारोहण जैसी साहसिक चुनौतियां, हर समय अपनी उत्कृष्टता प्रदर्शित की है। उन्होंने सभी जवानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि बेहद कठिन परिस्थितियों में अपने दृढ़ निश्चय और जज्बे को कायम रखकर एवरेस्ट को पार किया यह अत्यन्त प्रशंसनीय है।

इस अवसर पर एनसीसी की भूमिका की भी विशेष रूप से प्रशंसा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि एनसीसी कैडेट्स ने छोटी उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि इन कैडेट्स ने साबित कर दिया है कि अगर हौसला, जुनून और कठिन परिश्रम किया जाए तो छोटी उम्र में भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन युवा कैडेट्स ने यह सिद्ध कर दिया है कि सही दिशा, प्रशिक्षण और संकल्प के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने इस सफलता को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

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