किन्नौरी सेब की देश-दुनिया में बढ़ी पहचान, दस साल में 6.61 लाख मीट्रिक टन उत्पादन
रिकांगपिओ। किन्नौर के बागबानों की कड़ी मेहनत और क्षेत्र की अनुकूल जलवायु के चलते किन्नौरी सेब ने देश-दुनिया के बाजारों में अपनी अलग पहचान बनाई है। प्राकृतिक स्वाद, अधिक मिठास, रसदारपन और बेहतर क्रंच के लिए प्रसिद्ध किन्नौरी सेब की मांग लगातार बनी हुई है। जिले में रॉयल डिलीशियस सहित करीब 32 किस्मों के सेब का उत्पादन किया जा रहा है।
बागबानों के अनुसार, अनुकूल परिस्थितियों में किन्नौरी सेब को बिना कोल्ड स्टोरेज के भी घर पर तीन से चार महीने तक ताजा और रसयुक्त रखा जा सकता है। उद्यान विभाग किन्नौर के उपनिदेशक शमशेर सिंह देहरू के अनुसार, वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक दस वर्षों में जिले में कुल 6,61,047 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ। इस अवधि में उत्पादित सेब को देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही विदेशी बाजारों में भी बेचकर किन्नौर के बागबानों ने करोड़ों रुपये की आय अर्जित की।
वर्ष 2016-17 में किन्नौर में 60,210 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ, जो 24,08,400 बॉक्स के बराबर था। वर्ष 2017-18 में 52,189 मीट्रिक टन यानी 20,87,560 बॉक्स, जबकि 2018-19 में 61,673 मीट्रिक टन यानी 24,66,920 बॉक्स सेब का उत्पादन हुआ।
वर्ष 2019-20 में 56,864 मीट्रिक टन यानी 22,74,560 बॉक्स और 2020-21 में 73,330 मीट्रिक टन यानी 29,33,200 बॉक्स सेब का उत्पादन दर्ज किया गया।
वर्ष 2021-22 में 48,678 मीट्रिक टन यानी 19,47,120 बॉक्स और 2022-23 में 83,324 मीट्रिक टन यानी 33,32,960 बॉक्स सेब का उत्पादन हुआ। वर्ष 2023-24 में 58,299 मीट्रिक टन यानी 23,31,960 बॉक्स सेब का उत्पादन दर्ज किया गया।
वर्ष 2024-25 में 96,637 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ, जो 48,31,850 यूनिवर्सल कार्टन के बराबर था। वहीं वर्ष 2025-26 में 69,843 मीट्रिक टन यानी 34,92,150 यूनिवर्सल कार्टन सेब का उत्पादन हुआ।
सेब उत्पादन के आंकड़े में बॉक्स की संख्या को लेकर अंतर का कारण पैकिंग व्यवस्था में हुआ बदलाव है। वर्ष 2023-24 तक सेब उत्पादन का आंकड़ा 25 किलोग्राम क्षमता वाले बॉक्स के आधार पर दर्ज किया जाता था। सरकारी आदेशों के अनुसार वर्ष 2024-25 से उत्पादन का आंकड़ा 20 किलोग्राम के यूनिवर्सल कार्टन के आधार पर दर्ज किया जा रहा है। इसी वजह से वर्ष 2024-25 और 2025-26 के कार्टन आंकड़ों की तुलना पुराने वर्षों के बॉक्स आंकड़ों से सीधे नहीं की जा सकती।
किन्नौर में बागबान पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह की सेब किस्मों की बागवानी कर रहे हैं। इनमें रॉयल डिलीशियस, रेड डिलीशियस, गोल्डन डिलीशियस, रिच-ए-रेड, टॉप रेड, रेड गोल्ड, अर्ली फूजी, रेड फूजी, एडम्स, डार्क बैरन गाला, अर्ली रेड वन, फेन प्लस गाला, गाला श्निको, गाला श्निको रेड, गाला वैल, गेल गाला, ग्रैनी स्मिथ, ग्रैनी स्मिथ चैलेंजर, जेरोमाइन, किंग रोट, मेमा मास्टर, ओरेगन स्पर, रेड कैप वाल्टोड, रेड लम गाला, रेड वेलॉक्स, स्कारलेट स्पर, श्लेक्ट स्पर, सुपर चीफ, रेड चीफ और टी-रेक्स गाला समेत अन्य किस्में शामिल हैं।
