भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी ले.ज. एम. एम. लखेड़ा को श्रद्धांजलि देने पहुंचे राज्यपाल गुरमीत सिंह

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देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने मिजोरम के पूर्व राज्यपाल एवं पुडुचेरी के पूर्व उपराज्यपाल, भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एम. एम. लखेड़ा (सेवानिवृत्त), पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे राष्ट्र, भारतीय सेना और व्यक्तिगत रूप से अपने लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल एम. एम. लखेड़ा के देवलोकगमन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने उनके निवास पर पहुंचकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोक संतप्त परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान उनके साथ बिताए गए अनेक प्रेरणादायी और अविस्मरणीय क्षण स्मृतियों में पुनः ताजा हो उठे।

उन्होंने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल लखेड़ा एक उत्कृष्ट सैन्य कमांडर, दूरदर्शी प्रशासक तथा अत्यंत सरल, सहज और आत्मीय व्यक्तित्व के धनी थे। भारतीय सेना में उनका योगदान सदैव सम्मान और गर्व के साथ याद किया जाएगा।

अपने सैन्य जीवन की यादें साझा करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने बताया कि जब वे सिकंदराबाद में एक युवा मेजर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे, उस समय लेफ्टिनेंट जनरल एम. एम. लखेड़ा उनके जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) थे। उनके नेतृत्व, अनुशासन और कार्यशैली से उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला, जिसने उनके सैन्य जीवन को नई दिशा दी।

उन्होंने कहा कि बाद में नियति ने एक और सुंदर संयोग बनाया। सेना मुख्यालय, नई दिल्ली में जिस प्रतिष्ठित अडजुटेंट जनरल (AG) के पद की गरिमा लेफ्टिनेंट जनरल लखेड़ा ने अपने कार्यकाल में बढ़ाई थी, उसी पद पर आगे चलकर उन्हें भी सेवा करने का अवसर मिला। यह उनके लिए गर्व और प्रेरणा का विषय रहा।

लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने बताया कि जनरल लखेड़ा की मातृ रेजिमेंट 4 कुमाऊँ से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा है। कश्मीर में कोर कमांडर के रूप में कार्य करते हुए उन्हें इस वीर बटालियन के साथ निकटता से काम करने का अवसर मिला, जहां उन्होंने सैनिकों के अदम्य साहस, अनुशासन और गौरवशाली परंपराओं को बहुत करीब से देखा।

उन्होंने कहा कि जब-जब उन्हें लेफ्टिनेंट जनरल लखेड़ा से मिलने का अवसर मिला, उन्होंने सदैव आत्मीय स्नेह, अपनापन और बहुमूल्य मार्गदर्शन प्रदान किया। उनका व्यक्तित्व नेतृत्व, विनम्रता और सेवा भावना का अद्भुत संगम था, जो सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की वीर भूमि ने आज अपना एक गौरवशाली सपूत खो दिया है। देश की सीमाओं की रक्षा से लेकर सार्वजनिक जीवन के सर्वोच्च संवैधानिक दायित्वों तक, लेफ्टिनेंट जनरल एम. एम. लखेड़ा ने जिस निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

अंत में लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार और उनके असंख्य शुभचिंतकों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें। उन्होंने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल एम. एम. लखेड़ा का राष्ट्र सेवा, सैन्य नेतृत्व और सार्वजनिक जीवन में दिया गया योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

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