प्रधानमंत्री मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा पर दी देशवासियों को शुभकामनाएं

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दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की शाश्वत प्रासंगिकता एवं समाज में सद्भाव को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका पर बल दिया। मोदी ने एक्स पर एक संदेश में कहा, “बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान बुद्ध के आदर्शों को साकार करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता बहुत दृढ़ है। उनके विचार हमारे समाज में आनंद एवं एकता की भावना को मजबूत करें।”

उन्होंने अपने बयानों से इस बात पर प्रकाश डाला गया कि सरकार शांति, करुणा एवं एकता जैसे मूल्यों को बढ़ावा देने पर लगातार बल दे रही है जो बौद्ध दर्शन के केंद्र में हैं। बुद्ध पूर्णिमा को वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है जो कि गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति एवं महापरिनिर्वाण का प्रतीक है और भारत और विश्व में उनके लाखों अनुयायियों द्वारा मनाया जाता है।

भारत में इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि बुद्ध के जीवन से जुड़े कई स्थल, जिनमें बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर शामिल हैं, तीर्थयात्रा एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं। प्रधानमंत्री का संदेश भारत के समृद्ध आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है, विशेष रूप से उन पहलों के माध्यम से जो देश की बौद्ध विरासत को उसकी सांस्कृतिक कूटनीति के रूप में उजागर करती हैं।

PM मोदी का “खुशी एवं एकजुटता की भावना को गहरा करने” का आह्वान ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक चर्चा में प्रायः सामाजिक सामंजस्य एवं सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया जाता है और ये ऐसे विषय हैं जो बुद्ध की शिक्षाओं से गहराई से मेल खाते हैं। उनका संदेश राजनीतिक दृष्टिकोण से सभी नेताओं की शुभकामनाओं की श्रृंखला में शामिल है, जो त्योहार की सार्वभौमिक अपील तथा शांति एवं सद्भाव का संदेश देते हैं।

उपराष्ट्रपति ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को याद किया
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को याद करते हुए शुक्रवार को कहा कि बुद्ध पूर्णिमा लोगों को दयालु बनाने, सद्भाव बढ़ाने और सभी के कल्याण के लिए काम करने की प्रेरणा देती है। उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि भगवान बुद्ध का जीवन और उनकी दी गईं शिक्षाएं करुणा, अहिंसा तथा ज्ञान के मार्ग को प्रकाशित करती रहती हैं। राधाकृष्णन ने कहा कि शांति, सद्भाव और निस्वार्थ सेवा का उनका शाश्वत संदेश आज की दुनिया में भी अत्यंत प्रासंगिक बना हुआ है। उन्होंने लिखा, ”यह पवित्र दिन हमें दयालुता अपनाने, सद्भाव बढ़ाने और सभी के कल्याण के लिए काम करने की प्रेरणा दे।

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