मां चण्डी और मां मनसा देवी रोप वे की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़

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हरिद्वार: झारखंड के देवघर रोप वे हादसे के बाद उत्तराखंड में भी हड़कंप मचा हुआ है। यहां पहाड़ों पर भी जगह जगह रोपवे लगे हुए हैं। ऐसे में इस हादसे के बाद लोग अब रोप वे में सफर करने से कतराने भी लगे हैं। इस हादसे ने अन्य रोप वे की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।

हरिद्वार में करीब चार दशक पहले मां मनसा देवी मंदिर तक जाने के लिए उषा ब्रेको कंपनी ने रोप.वे स्थापित की थी। इसके 15 साल बाद 1997 में मां चंडी देवी मंदिर तक जाने के लिए भी इसी तरह के रोप वे की सुविधा दी गई। इतनी लंबे अवधि में एक ही बार हादसा हुआ है। उसके बाद अभी तक इन दोनों रोप.वे पर कोई हादसा नहीं हुआ है।

दरअसल साल 2010 में कुंभ के दौरान एक महिला की लापरवाही के चलते ट्राली डिस्बैलेंस हुई थी। जिससे गिरकर महिला चोटिल हो गई थी लेकिन उसकी जान बच गई। इसके अलावा आज तक कभी यहां पर कोई घटना घटित नहीं हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण यहां की सुरक्षा व्यवस्था है। रोप वे संचालन को लेकर उषा ब्रेको प्रबंधन कई चरणों में सुरक्षा व्यवस्था को समय.समय पर जांचता रहता है। इसके अलावा साल में दो बार उषा ब्रेको को एक एक हफ्ते के लिए बंद रखा जाता है। इस दौरान पूरी रोप वे की गहनता से जांच होती है ताकि उसमें आई किसी भी तरह की खामियों को तत्काल दूर कर यात्रियों को सुरक्षित यात्रा कराई जा सके।

उषा ब्रेको प्राइवेट लिमिटेड के प्रभारी मनोज डोभाल का कहना है कि हम मानवीय जिंदगी को ट्रांसपोर्ट कर रहे हैं तो उनकी सुरक्षा हमारी सबसे पहली जिम्मेदारी है। हमारे पास दक्ष इंजीनियर की टीम 24 घंटे उपलब्ध रहती है। ये टीम किसी भी तरह की परिस्थिति से निपटने के लिए सक्षम है। मनसा देवी और चंडी देवी रोप.वे सेवा शुरू होने का समय रोजाना सुबह 8 बजे है। इस सेवा के शुरू होने से पहले सुबह 2 घंटे तक इसकी व्यवस्थाओं को अनिवार्य रूप से जांचा जाता है। इस बात को देखा जाता है कि कहीं रोप.वे के संचालन में कोई गड़बड़ी तो नहीं है।

उन्होंने बताया कि रोपवे संचालन के दौरान रोजाना साप्ताहिक मासिक के साथ अर्द्धवार्षिक जांचों को नियमानुसार किया जाता है। ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की कोई आशंका न रह जाए। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए उषा ब्रेको ने रेस्क्यूअर की एक विशेष टीम को रखा हुआ है जो हर समय किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद रहती है। यदि किसी कारणवश रोपवे बीच में ही रुक जाता है तो उस परिस्थिति से निपटने के लिए यह टीम टावर टू टावर जाकर रोपवे में फंसे श्रद्धालुओं को भोजन पानी जैसी आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराती है।

उषा ब्रेको के प्रभारी डोभाल का दावा है कि बीते 40 सालों में उनके यहां रोपवे संचालन के दौरान कोई हादसा पेश नहीं आया है क्योंकि उनके यहां संचालन को लेकर सख्त नियमों का रोजाना 24 घंटे पालन किया जाता है।

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