116 लोगों की मौत… हजारों गिरफ्तारियां, नहीं थम रहा ईरान में विरोध प्रदर्शन

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दुबईः ईरान में प्रदर्शन लगातार बढ़ती जा रही है। आर्थिक तबाही से शुरू हुआ विरोध अब पूरे देश में फैलकर सत्ता के खिलाफ बड़ा विद्रोह बन चुका है। इस दौरान 116 से ज्यादा मौतें, 2600 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। 

ईरान में पिछले दो हफ्तों से लगातार चल रहे देशव्यापी विरोध प्रदर्शन अब अपने चरम पर पहुंच चुके हैं। दिसंबर 2025 के अंत में तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुई यह आग अब सभी 31 प्रांतों में फैल गई है। शुरुआत महंगाई और ईरानी रियाल के ऐतिहासिक पतन से हुई, लेकिन अब नारे सिर्फ आर्थिक राहत तक सीमित नहीं – लोग इस्लामी गणराज्य की सत्ता के खात्मे की मांग कर रहे हैं।

मौतों का आंकड़ा बढ़कर 116, हजारों गिरफ्तार

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में अब तक कम से कम 116 लोग मारे जा चुके हैं (जिनमें सुरक्षा बलों के सदस्य भी शामिल हैं)। गिरफ्तारियों की संख्या 2,600 से ज्यादा हो गई है। संगठन ने पहले भी ईरान के आंदोलनों में सटीक जानकारी देने का रिकॉर्ड रखा है। इंटरनेट ब्लैकआउट और फोन लाइनों के बंद होने से सही स्थिति का आकलन मुश्किल हो गया है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से पता चलता है कि तेहरान, मशहद, यज्द समेत दर्जनों शहरों में भारी भीड़ सड़कों पर उतरी हुई है।

खामेनेई का कड़ा रुख, मौत की सजा तक की धमकी

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनई ने सख्त चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को “दबाया” जाएगा। देश के अटॉर्नी जनरल ने और आगे बढ़ते हुए कहा कि विरोध में शामिल लोगों को “ईश्वर का दुश्मन” माना जाएगा – ईरानी कानून में यह आरोप मृत्युदंड तक पहुंच सकता है। सरकार ने इंटरनेट और संचार को पूरी तरह बंद कर दिया है, ताकि प्रदर्शन फैलने से रोका जा सके।

अमेरिका से ट्रंप की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर क्रूरता हुई, तो अमेरिका “जो भी जरूरी होगा” करेगा। उन्होंने ईरान की स्थिति पर “लॉक एंड लोडेड” होने का संकेत दिया है। इस बीच, निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने भी प्रदर्शनकारियों को शहरों पर कब्जा करने की अपील की है।

प्रदर्शन क्यों भड़के? रियाल का क्रैश और महंगाई की आग

सब कुछ 28 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ, जब ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले 14 लाख (लगभग 1.4 मिलियन) तक गिर गया – यह ऐतिहासिक निचला स्तर था।  
– महंगाई 40-50% से ऊपर पहुंच गई।  
– खाद्य तेल, चिकन, चावल जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें रातोंरात आसमान छू गईं।  
– कई सामान बाजारों से गायब हो गए।  
– सरकार की सस्ती डॉलर योजना खत्म होने से व्यापारियों ने दुकानें बंद कर हड़ताल कर दी।  

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