भारी बारिश के अलर्ट के बीच अमरनाथ यात्रा जारी, 1,801 श्रद्धालुओं का 28वां जत्था बालटाल के लिए रवाना

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी के बीच गुरुवार सुबह अमरनाथ यात्रा का 28वां जत्था कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ भगवती नगर यात्री निवास, जम्मू से बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। इस जत्थे में कुल 1,801 श्रद्धालु शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, काफिला सुबह 2:45 बजे सुरक्षा घेरे में रवाना किया गया। जोनल पुलिस कंट्रोल रूम के मुताबिक, जत्थे में 1,347 पुरुष, 351 महिलाएं, 89 साधु और 14 साध्वी शामिल हैं। श्रद्धालु 74 वाहनों में सवार होकर निकले, जिनमें 40 बसें, 12 मीडियम मोटर वाहन, 19 हल्के मोटर वाहन और तीन दोपहिया वाहन शामिल हैं।

इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने कश्मीर के कुछ हिस्सों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, बिजली गिरने, जबकि जम्मू संभाग में भूस्खलन, अचानक बाढ़, मडस्लाइड और पत्थर गिरने का भी अलर्ट जारी किया है।

गुरुवार को श्रीनगर में दिनभर बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना है, जबकि जम्मू में हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी-तूफान का अनुमान है।

यह जत्था ऐसे समय रवाना हुआ है, जब एक दिन पहले ही अमरनाथ यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 4.70 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। सुरक्षा कारणों से 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ के मद्देनज़र जम्मू से नए और वापसी काफिलों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। हालांकि, बालटाल बेस कैंप में पहले से मौजूद श्रद्धालुओं की यात्रा और बाबा बर्फानी के दर्शन सामान्य रूप से जारी रहे।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को 2,943 श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में दर्शन किए। इनमें 1,850 पुरुष, 868 महिलाएं, 38 बच्चे, 39 साधु, 12 साध्वी, दो ट्रांसजेंडर श्रद्धालु और 134 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। इसके साथ ही इस वर्ष अमरनाथ यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 4,70,929 पहुंच गई है।

गौरतलब है कि 38 दिनों की अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी और इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होगा। रखरखाव कार्यों के चलते पारंपरिक पहलगाम मार्ग पहले ही बंद किया जा चुका है। फिलहाल श्रद्धालुओं के लिए बालटाल मार्ग ही एकमात्र संचालित यात्रा मार्ग है।

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