संवाद से ही समरसता और विकास का मार्ग प्रशस्त: राज्यपाल गुरमीत सिंह
देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि संवाद केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि विश्वास, समझ और स्थायी समाधान का सशक्त सेतु है। उन्होंने कहा कि जहां संवाद जीवित रहता है, वहां मतभेद भी सहयोग और सकारात्मक समाधान का मार्ग खोज लेते हैं।
लोक भवन में महावीरायतन फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘संवाद से समाधान’ कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस आयोजन ने उनके इस विश्वास को और मजबूत किया है कि समाज में संवाद की संस्कृति ही समरसता और विकास की आधारशिला है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भगवान महावीर स्वामी का आत्मसंयम, अहिंसा, करुणा और ‘जियो और जीने दो’ का संदेश सम्पूर्ण मानवता के लिए पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को अपनाकर विश्व में शांति और सद्भाव की स्थापना की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता, साझा सांस्कृतिक विरासत और समरसता की भावना में है। यदि संवाद, सद्भाव और सह-अस्तित्व को जीवन का आधार बनाया जाए तो एक सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है।
राज्यपाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड से शांति, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का संदेश देश और दुनिया तक पहुंचे, इसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने समाज में संवाद और सहयोग की संस्कृति को निरंतर मजबूत बनाने का आह्वान किया।
