राज्यपाल ने किया ‘Absolute Intelligence’ पुस्तक और उसके हिन्दी रूपांतरण ‘प्रज्ञा’ का विमोचन

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देहरादून। उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने मंगलवार को राजभवन स्थित लोक भवन में ‘Absolute Intelligence’ पुस्तक तथा उसके हिन्दी रूपांतरण ‘प्रज्ञा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) पर आधारित चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि विज्ञान, आध्यात्मिकता, नैतिकता और मानवीय मूल्यों के समन्वय की एक सार्थक विचार-यात्रा प्रस्तुत करती है।

राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही है। ऐसे दौर में यह आवश्यक है कि तकनीकी विकास के साथ नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का भी संतुलित समावेश हो। उन्होंने कहा कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य मानवता का स्थान लेना नहीं, बल्कि मानव जीवन को अधिक सुरक्षित, सरल, समृद्ध और कल्याणकारी बनाना है।

उन्होंने कहा कि विज्ञान और आध्यात्मिकता परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि तकनीकी प्रगति को मानवीय मूल्यों के साथ जोड़ा जाए, तो यह समाज और राष्ट्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस प्रकार की पुस्तकों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग की भावना को भी बढ़ावा मिलता है।

राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘Absolute Intelligence’ तथा उसका हिन्दी संस्करण ‘प्रज्ञा’ पाठकों को विज्ञान और आध्यात्मिकता के संतुलित दृष्टिकोण के साथ जीवन को नए नजरिए से समझने तथा सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, नीति-निर्माताओं और तकनीक में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने भी पुस्तक की विषयवस्तु की सराहना करते हुए इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण कृति बताया।

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